हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत की याद में शुक्रवार को भी मुहर्रम की आठवीं तारीख के मौके पर शहर में शिया और सुन्नी समुदायों ने अलम और छड़ों के अलग-अलग जुलूस निकाले।
कदीमी रास्तों से होते हुए यह जुलूस वहीं पहुंचकर तमाम हुए, जहां से इनकी शुरुआत हुई थी। मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत की दास्तां सुनाई गई। ऑल इंडिया शिया सोसायटी की सरपरस्ती में अंजुमने हैदरी की जानिब से मजलिस के बाद किला गेट से अलम का जुलूस निकाला गया।
मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी ने कहा कि मुहर्रम की आठवीं तारीख इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की शहादत की याद में मनाई जाती है। यजीद ने पानी पर पहरा लगा रखा था। छोटे बच्चे पानी के लिए भी बेचैन थे। हजरत अब्बास बच्चों के लिए पानी लाने गए थे। यजीदी फौज ने उन्हें शहीद कर दिया।
इस मौके पर जुलूस में शामिल लोग मर्सिये और नौहे पढ़कर माहौल को गमगीन बना रहे थे, जबकि नौजवान छाती पीटकर मातम करते हुए इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत पर रंज मना रहे थे। भ्रमण के बाद मातमी जुलूस इमाम बारगाह पहुंचकर समाप्त हुआ।
मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी ने कहा कि इस्लाम ने हर मर्द और औरत पर इल्म हासिल करना फर्ज करार दिया है। इल्म के साथ अमल बहुत जरूरी है। इंसान इल्म से जो अच्छी बातें सीखता है, उस पर अमल करना भी निहायत जरूरी है। जुलूस में सदर हसन मोहम्मद, चांद मियां, मुवी, एजाज मेहंदी, कमर, तनवीर, सफदर, शुजा मोहम्मद, इमरान, बब्बू, रिजवान, मोहम्मद तकी, जीशान, ऐनुल, रजा मेहंदी, सैफी, जौली, जौनी, शीकर, मसरूर, शब्बर, बबली, वसीम, परवेज, साहिल, सलमान, जाहिद हुसैन, शेरू, सुर्खान, लड्डन, आबिद हुसैन, हामिद हुसैन, जव्वार हुसैन, रईस आदि थे।
----