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हाथरस सड़क हादसा: तेज रफ्तार ऑटो ने बाइक को मारी टक्कर, हादसे में दो की मौत, युवती गंभीर घायल

Tue, 01 Sep 2026 10:46 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

सासनी की ओर से आ रहे ऑटो चालक ने दूसरी बाइक को बचाने के प्रयास में ओवरटेक किया। तभी उनकी बाइक से ऑटो की जोरदार भिड़ंत हो गई। गेंदालाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शिवानी गंभीर रूप से घायल हो गई। ऑटो में सवार बृज किशोर सक्सेना भी गंभीर रूप से घायल हुए।
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शोक में परिजन, हादसे में क्षतिग्रस्त बाइक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सासनी अंतर्गत आगरा-अलीगढ़ राजमार्ग पर गांव बरसै के निकट 31 अगस्त शाम करीब साढ़े सात बजे पुलिया वाले बाबा के पास ऑटो ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में 50 वर्षीय गेंदालाल निवासी बाद बामनी, अलीगढ़ और 62 वर्षीय बृज किशोर सक्सेना निवासी नाई का नगला हाथरस की मौत हो गई। गेंदालाल की 19 वर्षीय बेटी शिवानी गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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बताया गया कि गेंदालाल अपनी बेटी शिवानी के साथ हतीसा भगवंतपुर में अपने मामा बबलू सिंह की ससुराल में कार्यक्रम में शामिल होकर बाइक से गांव लौट रहे थे। सोमवार रात करीब 7:30 बजे उनकी बाइक बरसे के निकट पुलिया वाले बाबा के पास पहुंची। इस दौरान सासनी की ओर से आ रहे ऑटो चालक ने दूसरी बाइक को बचाने के प्रयास में ओवरटेक किया। तभी उनकी बाइक से ऑटो की जोरदार भिड़ंत हो गई।
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गेंदालाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शिवानी गंभीर रूप से घायल हो गई। ऑटो में सवार बृज किशोर सक्सेना भी गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सासनी लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने बृजकिशोर को मृत घोषित कर दिया। शिवानी की गंभीर हालत को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। कोतवाली की प्रभारी निरीक्षक विपिन चौधरी ने बताया कि क्षतिग्रस्त बाइक और ऑटो को कब्जे में ले लिया गया है। दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया है।
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दामाद बोले-ससुर को रोका था, नहीं माने
बृज किशोर कस्बे की टीचर्स कॉलोनी स्थित अपने दामाद दीपक सक्सेना के घर से हाथरस लौट रहे थे। दीपक ने बताया कि उन्होंने ससुर को जाने से रोकने का काफी प्रयास किया था, लेकिन वह नहीं माने। शायद मौत उन्हें खींचकर ले गई। दीपक का कहना है कि अगर ससुर ने उनकी मान ली होती तो शायद उनकी जान बच जाती है। उनकी मौत से परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

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