दाऊजी मेला के इतिहास में पहली बार दंगल आयोजन का विधिवत सामापन नहीं हो पाया। हर बार पूजा अर्चना के उपरांत दंगल का समापन होता है। यहां स्थापित की गई हनुमान की प्रतिमा को विधिवत् तरीके से अपनी मूल जगह पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद समारोह के समापन पर विधि विधान के अनुरूप वापस ले जाया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
बोले संयोजक, प्रशासन से नहीं मिला पैसा
दंगल के संयोजक मुनेश पाल बघेल ने बताया कि चार दिन दाऊबाबा की कृपा से दंगल ऐतिहासिक रहा। सोमवार की रात को साढ़े बारह बजे तक दंगल चला। आखिरी बड़ी कुश्ती होनी थी,लेकिन एक साजिश के तहत स्थानीय तीस पहलवानों को बुलाकर हंगामा करा दिया। प्रशासन से दंगल का पैसा नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि स्थानीय पहलवान दोबारा से कुश्ती कराने की मांग कर रहे थे। कई ऐसे पहलवानों ने पैसा ले लिया, जिन्होंने कुश्ती ही नहीं लड़ी। कुछ पहलवानों को चेक के माध्यम से भुगतान किया गया है। ढोल बजाने वाले के साथ मारपीट कर उससे जबरन यह कहवालाया गया है कि उसे पैसा नहीं मिला है। इसके सारे साक्ष्य मेरे पास मौजूद है। मुझे प्रशासन की तरफ से एक भी पैसा नहीं मिला है। पूर्व में दंगल शुरु होने से पहले ही चेक मिलता था। मैंने खुद डीएम से जाकर मांग की कि दंगल का चेक दे दिया जाये। अपने पास से पूरा पैसा खर्च किया है। मेरी छवि को धूमिल करने के लिए ऐसा नाटक किया गया है।
एडीएम साहब की तबियत खराब होने के कारण चेक मिलने में देरी हो गई है। जल्द ही दंगल संयोजक को चेक दे दिया जाएगा। -रवेन्द्र कुमार, एसडीएम सदर, हाथरस।