महिला साध्वी रेखा के पुत्र दिनेश कुमार ने बताया कि 2005 में उनकी मां ने सन्यास ले लिया था। भिक्षा मांग कर गुजारा करती थी। उन्होंने कई बार उन्हें घर ले जाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया और कहती थी कि अब पूरा जीवन साधु बनकर ही गुजारना है। उन्होंने बताया कि पिछली सर्दियों में उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। तब वह आए थे। सोमवार को भी उनकी तबीयत खराब हुई तो साथ में रहने वाले साधु ने ही उन्हें दवा लाकर दी थी।
चांदी की मूर्ति के लिए होता था विवाद
मृतका के पुत्र का कहना है कि नेमपाल और उनकी माता के बीच मां दुर्गा की एक चांदी की मूर्ति को पर विवाद था। हालांकि की पुलिस का कहना है कि यह मूर्ति कुटिया में ही मिल गई है।