मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन सेवा योजना के तहत ग्रामीण अंचल के लोगों को सुलभ व सस्ती बस सेवा उपलब्ध कराने के दावों की जिले में हवा निकल रही है। सुदूर गांवों को सीधे जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए तैयार किए गए परमिट और रूट को दरकिनार कर निजी बस को सीधे मुख्य हाईवे पर दौड़ाया जा रहा है।
आलम यह है कि जहां जिले में 10 निजी बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया था, वहीं पूरी योजना महज एक निजी बस के सहारे सिमटकर रह गई है। वह इकलौती बस भी तय ग्रामीण रास्तों से नदारद होकर सीधे हाथरस-सिकंदराराऊ मार्ग पर कमाई के चक्कर में फर्राटा भर रही है।
योजना के तहत बस का वास्तविक रूट बाजिदपुर से सिकंदराराऊ, हसायन, सलेमपुर होते हुए बाईपास और कलक्ट्रेट तक निर्धारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बाजिदपुर व हसायन क्षेत्र के ग्रामीण बाशिंदों, छात्र-छात्राओं और कलक्ट्रेट आने वाले फरियादियों को सीधी व सुलभ परिवहन सुविधा देना था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। बस चालक और ऑपरेटर ग्रामीण अंचल के रास्तों को पूरी तरह छोड़कर सीधे हाथरस-सिकंदराराऊ हाईवे पर गाड़ी दौड़ा रहे हैं।
ड्राइवर-कंडक्टर भी कर रहे शिकायत
इस मनमानी पर रोडवेज के चालक और कंडक्टर स्वयं उच्चाधिकारियों को लगातार शिकायत दर्ज करा रहे हैं, क्योंकि हाईवे पर अनाधिकृत रूप से बस चलने से तय परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से आंखें मूंदे बैठे हैं। मात्र 500 रुपये के परमिट शुल्क की आड़ में ग्रामीण जनता के हक पर डाका डालकर हाईवे पर सीधे सवारियां ढोने का यह खेल विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। जिन ग्रामीणों के लिए यह सेवा शुरू की गई थी, वे आज भी डग्गामार वाहनों और महंगे साधनों में धक्के खाने को मजबूर हैं।
इस तरह की शिकायत मेरे संज्ञान में हैं। एक्स पर भी इस बारे में शिकायत हुई। मैं अभी बाहर हूं। लौटकर आते ही इस मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-मंगेश कुमार, डिपो प्रभारी, हाथरस डिपो।