गांव में दुकान से सामान लेने निकले 12 वर्षीय कन्हैया को रास्ते में आवारा सांड़ ने हमला कर पटक-पटककर घायल कर दिया। गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। रक्षाबंधन से महज चार दिन पहले परिवार के इकलौते बेटे की मौत से घर में कोहराम मच गया। मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
गांव अंडौली निवासी भरत सिंह का 12 वर्षीय बेटा कन्हैया सोमवार रात करीब आठ बजे घर से गांव की परचून की दुकान पर सामान लेने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में एक आवारा सांड़ ने उस पर हमला कर दिया। सांड ने कन्हैया को कई बार पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों ने किसी तरह सांड़ को वहां से हटाया और बच्चे को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसायन लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सक ने कन्हैया को मृत घोषित कर दिया।
दो बहनों के बीच इकलौता भाई था कन्हैया : कन्हैया अपने परिवार में दो बहनों के बीच इकलौता भाई था। उसके पिता गांव में मजदूरी करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही पिता भरत सिंह बेसुध हो गए। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
रक्षाबंधन से पहले छिन गई भाई की खुशियां : रक्षाबंधन का पर्व नजदीक होने के कारण परिवार में त्योहार की तैयारियां होनी थीं, लेकिन भाई की मौत से दोनों बहनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ग्रामीणों के अनुसार कन्हैया की मौत से पूरे गांव में शोक छा गया और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम शव पैतृक गांव पहुंचा, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
सांड़ों के हमले में चार जानें गईं
13 जुलाई 2026 : मंस्या कला गांव में खेत पर गए बुजुर्ग लीलाधर पर सांड़ ने हमला किया। उनकी मौत हो गई।
अक्तूबर 2025 : अगसौली में 57 वर्षीय किसान राकेश यादव को सांड़ ने गंभीर रूप से घायल कर दिया। उपचार के 12 दिन बाद उनकी मौत हो गई।
30 जुलाई 2020 : सहपऊ के बागपुर निवासी 55 वर्षीय इतवारी खां पर देर रात सांड़ ने हमला कर दिया। सींग पेट में घुसने से उनकी मौत हो गई।
गोशालाओं में जगह, फिर सड़क पर क्यों?
जिले में 29 गोशालाओं में कुल क्षमता 12 हजार है। फिलहाल प्रशासन यहां 9500 गोवंश संरक्षित होने का दावा कर रहा है। शहरी क्षेत्र में नगर निकाय और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत स्तर पर देखरेख की जा रही है। हाथरस नगर पालिका में एक कैटल कैचर वैन, सात श्रमिक और दो चालक भी हैं। इसके बावजूद सड़कों पर निराश्रित गोवंश दिखाई दे रहे हैं। कन्हैया की मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि खतरे वाले स्थानों से सांड़ों को पकड़ने के लिए शिकायत के बाद कार्रवाई की तय समय सीमा और उस पर सख्ती से अमल क्यों नहीं हो पा रहा?