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फिर गरमाई जिले की सियासत

Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
Hathras
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हाथरस। आय से अधिक संपत्ति और धोखधड़ी से जमीन कब्जाने के आरोप में पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के खिलाफ की गई सीबीआई जांच की सिफारिश से जिले की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस कार्रवाई से विरोधियों के चेहरे खिल उठे हैं वहीं बसपाईयों के माथे पर बल पड़ गए हैं। विरोधियों का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पूर्व ऊर्जा मंत्री के खिलाफ यह कार्रवाई बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। जबकि पूर्व ऊर्जामंत्री ने इस मामले में लोकायुक्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों बसपा सरकार में तत्कालीन ऊर्जामंत्री रामवीर उपाध्याय व उनके परिजनों के खिलाफ लोकायुक्त में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने सहित कई गंभीर शिकायतें की गई थीं। उनके परिजनों पर प्रशासनिक अधिकारियों से सांठ-गांठ कर जमीन कब्जाने, विधायक निधि का दुरुपयोग करने और लेबर कालोनी मकान के सामने पार्क पर अवैध कब्जा करने के आरोप लगे थे। विधानसभा चुनाव के दौरान लोकायुक्त से की गई इन शिकायतों से जिले की सियासत गरमा गई थी। चुनाव के दौरान रामवीर उपाध्याय और शिकायतकर्ता सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने एक दूसरे पर तमाम आरोप-प्रत्यारोग लगाए थे। पूरे विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा हावी रहा था। इस मामले में उपाध्याय के घोर विरोधी रहे सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने लोकायुक्त को इस कार्रवाई के लिए बधाई दी है। उनका कहना है कि उपाध्याय और उनके परिवार ने सत्ता का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से धन कमाया है। दिल्ली की कई कंपनियों में इनके करोड़ों रुपये लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब रामवीर पूरी तरह से फंस चुके हैं और वह बच नहीं पाएंगे। उपाध्याय के खिलाफ लडे़ सपा के पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान का कहना है कि यह कार्रवाई तो पहले ही हो जानी चाहिए थी। उपाध्याय और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार में लिप्त है। उपाध्याय तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देंगे नहीं, लेकिन जनता जरूर उनसे हिसाब मांगेगी। भाजपा के पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान ने भी कहा है कि लोकायुक्त का यह कदम सराहनीय है। उन्होंने कहा है कि रामवीर उपाध्याय ने अपने शासनकाल में जमकर भ्रष्टाचार किया है, यह इसी का परिणाम है। हाथरस। पूर्व ऊर्जामंत्री रामवीर उपाध्याय ने कहा कि लोकायुक्त की यह सिफारिश राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने लोकायुक्त पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त ने सपा के एजेंट के रूप में काम करके सरकार को खुश करने का काम किया है। उन्होंने कहा है कि मेरे विरोधियों ने लोकायुक्त को रुपये देकर यह सिफारिशें कराई हैं। उन्होंने मांग की है कि उनकी तो सीबीआई जांच कराई जाए, लेकिन साथ ही लोकायुक्त की भी सीबीआई जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि यह मामला अब संसद से लेकर विधानसभा और विधान परिषद में उठवाएंगे।
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