सादाबाद। क्षेत्र के ग्राम रसमई के समीप सादाबाद रजवाहे की रविवार की रात्रि को पटरी कट जाने से करीब आधा दर्जन किसानों की आलू की करीब 60 बीघा फसल डूबकर नष्ट हो गई। सोमवार की सुबह किसानों को बंबे की पटरी कटने की जानकारी हुई तो किसान बंबे से पानी के कटाव को रोकने के लिए स्वयं जुट गए, जबकि सूचना देने के बाद भी मांट ब्रांच का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्राम रसमई (नसीरपुर) निवासी मायादेवी पत्नी स्व. भगवान सिंह, सुमन पत्नी लोकेंद्र, पूरन सिंह पुत्र भोला सिंह, विशंभर सिंह पुत्र बुद्धसेन, किशनपाल पुत्र हरीसिंह, ओमप्रकाश पुत्र गोकुल सिंह और पूरन सिंह पुत्र मुंशीलाल की फसलें बंबे के पानी में डूब गईं। पिछले सप्ताह बिसावर क्षेत्र के ग्राम टीकैत और चिहत्तर में दघैंटा रजवाहा के दो बार कट जाने पर दर्जनों किसानों की करीब 500 बीघा आलू और गेहूं आदि की फसल भी रजवाह की पटरी कट जाने के कारण नष्ट हो गई, लेकिन मजे की बात यह है कि किसानों के नुकसान की न तो प्रशासन ने कोई सुधि ली और न सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी पहुंचा। रालोद के प्रदेश सचिव प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी ने डीएम से रजवाहों की पटरियां कटने से बर्बाद हुई किसानों की फसलों का सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है। क्षेत्र में अधिकांश रजवाहों की टेल हैं। वैसे तो इनमें पानी आता ही नहीं है और आ भी जाए तो यह किसानों के लिए बजाय लाभ के कहर बन जाता है। सिंचाई विभाग द्वारा क्षेत्र के रजवाहों की सफाई और पटरियों को दुरुस्त कराने का यह आलम है कि सड़कों और पुलों के आसपास सफाई और पटरी को ठीक करा दिया जाता है, ताकि कोई अधिकारी यहां से गुजरे तो उसे दिखाई दे की रजवाहों की सफाई और मरम्मत का कार्य यहां हो चुका है। हालत यह है क्षेत्र के कई रजवाहों की पटरियां जंगली जानवरों द्वारा उनमे मांद बनाकर खोखली कर दी गई हैं, जिससे पानी आने पर यह पटरियां कट जाती हैं। रही सादाबाद रजवाहे की बात तो इसमें कभी पानी आता ही नहीं है और अब जाकर पानी आया है तो रसमई के किसानों के ऊपर यह कहर बनकर टूट पड़ा।