हाथरस। मिलावट की मंडी में आहार में लोगों को पोषक तत्वों की जगह मिलावटी तत्व परोसे जा रहे हैं। दूध, तेल, घी से लेकर मसाले व अन्य खाद्य पदार्थ तक में मिलावटखोर ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए ऐसे अखाद्य पदार्थों को मिला रहे हैं। सिस्टम की सुस्ती से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। और तो और थैलियों में बिकने वाले मिनरल वाटर भी कितना शुद्ध है, इस बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता। मिलावट की एक मुख्य वजह यह भी है कि लोगों को प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जागरूक नहीं किया जाता। चटकदार मसाले, रंगों व वर्क से चमक रही मिठाईयां, सिंथेटिक दूध व उसके उत्पाद लोगों के घर बड़ी आसानी से पहुंच जाते हैं। मिलावटी तेल और घी लोग मार्केट से खरीद लाते है और इसका खाने-पीने में इस्तेमाल करते हैं। इसमें जानलेवा मिलावटी तत्व लोगों के शरीर में नासूर की तरह अपना काम करते हैं और उन्हें जानलेवा बीमारी से ग्रस्त कर देते हैं। बात यदि छापेमारी की करें तो छापे के दौरान नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जाता है। वहां से महीनों में रिपोर्ट आती है और तब तक सब कुछ सुस्त हो जाता है। सिस्टम का यह सुस्त रवैया मिलावटखोरों के हौसले बढ़ा रहा है।
सरसों का तेल--भुसी का तेल, वटर एलो कलर
हल्दी--पिसा चावल, मैटेलिक एलो कलर
देशी घी--पामआयल, वनस्पति घी, एसेंस
मिर्च पाउडर--घटिया पिसी मिर्च, सूडान सेकिंड कलर
दूध--मिल्क पाउडर, ग्लूकोज, रिफाइंड, इजी या अन्य डिटर्जेंट
मावा--स्टार्च के अलावा सिंथेटिक दूध का प्रयोग
इसके अलावा मिठाईयों में कलर और एल्मुनियम के वर्क लगाए जाते हैं। दलहन और गेहूं के आटे में भी मिलावट होती है। कुछ मिलावटी तत्वों से तो केंसर, लकवा और पेट से संबंधित काफी बीमारियां हो जाती हैं। और तो और यहां मिनरल वाटर के काफी प्लांट भी मानकों पर खरे नहीं उतरते।