हाथरस। दिवाली जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे ही आतिशबाजी की दुकानें शहर और कस्बों में घनी आबादी वाले इलाकों में सजनी शुरू हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन का अभी तक इस पर ध्यान नहीं है। अभी तक यह भी तय नहीं किया गया है कि इस बार किस स्थान पर आतिशबाजी बिकेगी। शासन-प्रशासन के निर्देश के बावजूद स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी से मौजूदा समय में भी शहर और आसपास के कस्बों में घनी आबादी वाले इलाकों में पटाखों के दुकानों का खुलेआम संचालन शुरू हो गया है। अधिकारियों की स्वार्थपूर्ति होने के कारण इन लोगों के लाइसेंस को शासन की नीतियों के अनुरूप हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रिन्यूअल किया जा रहा है, जिससे यह अपना कारोबार बेरोक-टोक चला सकें। जिला प्रशासन के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो तहसील हाथरस में कुल 33 स्थायी लाइसेंसी पटाखे बनाने वाले हैं। इनमें 4 लाइसेंसी नवीपुर में, तीन मेंडू में, चार मुरसान में हैं। बाकी सभी लाइसेंसी हाथरस शहर के हैं, जोकि बीच बाजार में अपना करोबार संचालित कर रहे हैं। तहसील सासनी में 11 लाइसेंसी है। इनमें से 2 के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं, जो कस्बा सासनी सहित तिलौठी, बिर्रा, बिजहारी, दरियापुर और नगला उम्मेद आदि में पटाखे बनाने और बेचने का काम करते हैं। तहसील सिकंदराराऊ में 13 लाइसेंसी है। इनमें एक निलंबित है। बाकी के 12 नगला लाला सहित कस्बा में बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। तहसील सादाबाद में 7 लाइसेंसी है। दो के लाइसेंस निलंबित है। पांच कस्बा में ही बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं, लेकिन इनके इस कारोबार पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।