हाथरस। मरणोपरांत नेत्रदान, देहदान आदि करने के लिए जागरूक करने को स्वास्थ्य विभाग और सरकारें करोड़ों रुपये प्रसार में खर्च कर रही हैं। दूसरी ओर जो लोग इस महादान के लिए आगे आ रहे हैं उनको औपचारिकताओं के मकड़जाल में उलझाया जा रहा है। ऐसा ही हो रहा है सरस्वती डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और शिक्षाविद् 79 वर्षीय डॉ. रवींद्र मोहन के साथ। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में देहदान की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह एसपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले लिया है लेकिन प्रशासन से एनओसी नहीं मिल रही है। ऐसे में डॉ. रवींद्र मोहन इस बात को लेकर बेचैन हैं कि कहीं सांस का सफर थमने के बाद उनकी आखिरी इच्छा अधूरी न रह जाए।
वयोवृद्ध शिक्षाविद् डॉ. रवींद्र मोहन ने अपने शरीर की वसीयत करते हुए अपनी आयु की स्थिति बताई और कुछ लोगों के नाम भी बतौर गवाह लिखाए। वसीयत में उल्लेख किया कि मृत्यु के 24 घंटे के अंदर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सूचना दी जाएगी। मरणोपरांत मेडिकल विद्यार्थी उनके शरीर पर अध्ययन और शोध कार्य कर सकें जिससे भविष्य के चिकित्सा लक्ष्यों को प्राप्त करने में वह सफल हो सकें। मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक ने कुछ औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कहा। इस पर एसपी ने अपनी रिपोर्ट दे दी लेकिन प्रशासनिक स्तर पर आकर मामला अटक गया है।