हाथरस। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर त्वरित वेतन पुनरीक्षण समझौता और बैंकिंग क्षेत्र में किए गए सुधारों को रोकने के लिए पूरे जिले के बैंक अधिकारी और कर्मचारी दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। बैंक अफसरों और कर्मचारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। फोरम के जिला संयोजक बीएस जैन ने कहा कि बैंक कर्मियों के राष्ट्रीय संगठन ने दसवें द्विपक्षीय वेतन समझौते के लिए समय से मांग पत्र दिया था। संगठन लगातार यह प्रयास करता रहा कि बैंक कर्मियों का वेतन समझौता शांतीपूर्ण ढंग से वार्ता के माध्यम से हो जाए, लेकिन आईबीए ने कभी भी बैंक कर्मियाें की वेतन पुनरीक्षण की मांग को गंभीरता से नहीं लिया। 27 जनवरी की वार्ता में 0.5 फीसदी की वृद्धि कर कुल 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव बैंक कर्मचारी संगठनों को उकसाने वाला था, इसलिए संगठन को मजबूरी में 10 और 11 फरवरी की हड़ताल करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि 10 फरवरी की हड़ताल पूरे देश में सफल रही, जिससे बौखलाकर वित्तमंत्री पी.चिदंबरम देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं। बैंकों का सारा मुनाफा वेतन बांटने के लिए नहीं है। यदि बैंक कर्मियों की वेतन-पेंशन वृद्धि की मांग मानी तो 3000 करोड़ का बोझ पड़ेगा। बैंक कर्मी मेहनत कर बैंकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाते हैं, परंतु उस लाभ में सरकार की नीतियों के कारण लाभ का भारी भाग अशोध्य ऋणों को समायोजित करने के प्रावधान में चला जाता है और सरकार लाभांश के रुप में हिस्सा लेती है। वर्ष 12- 13 में फिर भी शुद्ध लाभ 50,000 करोड़ के लगभग हुआ है। यदि बैंक कर्मी 3,000 करोड़ इस लाभ में से मांग रहा है तो वह कोई गुनाह नहीं कर रहा है। वित्त मंत्री बैंक कर्मियों की वेतन पुनरीक्षण की मांगों पर गंभीरता से विचार करें और धमकी न दें। बैंक कर्मी किसी की दया पर नहीं पल रहा। यदि ऐसे ही धमकी दी तो राष्ट्रीय संगठन बड़ा आंदोलन करने के लिए विवश होगा। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। एनसीबीई नेता रघुनंदन अरोरा ने वित्त मंत्री के बयान की घोर निंदा की और कहा कि बैंक कर्मी ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं। यूपी ग्रामीण बैंक स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष जीके शर्मा ने कहा कि पूरे देश का बैंकों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी एकजुटता से हड़ताल को सफल बना रहा है। इस मौके पर आयबॉक प्रतिनिधि अविनाश अरोरा, वीके शर्मा, चक्रवती पाठक, राकेश वर्मा, पीएस रावत, नवलकिशोर शर्मा, ओंकार सिंह, डीसी गुप्ता, बनी सिंह, ओमप्रकाश, उमाशंकर जैन, आरबी वर्मा, उमेश वार्ष्णेय, डीके वर्मा, हेमंत कुमार सिंह, अनुज कुमार, नन्नूमल, डीआर अग्रवाल, अशोक शर्मा आदि मौजूद थे।