सादाबाद। बीटीसी 2012 एग्जाम का पंजीकरण कराने वाली एक छात्रा बैंक लिपिक की लापरवाही का शिकार हो गई। पंजीकरण कराने के बाद छात्रा ने कस्बे की एक बैंक शाखा में 400 रुपये की पंजीकरण फीस चालान के रूप में जमा कर दी। लेकिन फीस जमा हो जाने के बाद जब छात्रा बीटीसी का फॉर्म भरने साइबर कैफे पर गई तो न तो बैंक द्वारा दिया गया जर्नल नंबर मैच हुआ और न ही रजिस्ट्रेशन नंबर। कस्बा बिसावर की छात्रा सुलेखा सिंह पुत्री रामवीर सिंह ने गत दिनाें बीटीसी फार्म भरने हेतु कस्बे की स्टेट बैंक की शाखा में चालान फार्म भरकर रजिस्ट्रेशन फीस जमा की थी। लेकिन जब दो दिन बाद छात्रा ने साइबर कैफे पर बीटीसी फार्म में फीस के रूप में बैंक द्वारा दिया गया जर्नल नंबर व रजिस्ट्रेशन नंबर डाला तो वह मैच नहीं हुआ। इससे परेशान छात्रा ने कई बार बैंक के चक्कर लगाए और बैंक लिपिक से भी मिली लेकिन उसका न तो रजिस्ट्रेशन नंबर सही हो सका और न ही जर्नल नंबर। इससे परेशान छात्रा ने जब इसकी शिकायत एसबीआई की बिजनेस ब्रांच लखनऊ में दर्ज कराई तो वहां से पता चला कि उस रजिस्ट्रेशन नंबर पर कोई फीस जमा नहीं की गई है। जबकि बैंक ने छात्रा को यह लिखकर दे दिया कि उसके द्वारा छात्रा की रजिस्ट्रेशन फीस उक्त नंबर पर ही जमा की गई है। इससे छात्रा बीटीसी का फार्म जमा नहीं कर सकी। छात्रा का कहना है कि बैंक लिपिक ने उसे गुमराह कर उसका भविष्य अंधकारमय कर दिया है। इस प्रकरण की शिकायत वह उच्चाधिकारियों से करेगी। छात्रा के भाई अमित प्रताप सिंह का कहना है कि अगर सुनवाई न हुई तो वह न्यायालय की शरण लेंगे।