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भंडारित किए गए आलू की कीमत का ब्याज सहित करें भुगतान

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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
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हाथरस। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने एक कोल्ड स्टोरेज प्रबंधक को आलू किसान द्वारा उसके कोल्ड में भंडारित कि ए गए आलू की कीमत मय सात फीसदी ब्याज के देने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोल्ड स्टोरेज संचालक को आदेश दिए हैं कि वह किसान को मानसिक, आर्थिक, शारीरिक क्षति हेतु पांच हजार व परिवाद व्यय हेतु दो हजार रुपये की राशि भी दे।

फोरम में लाल सिंह निवासी मोनिया थाना सादाबाद ने आरआर शीतगृह के मालिक/प्रबंधक के खिलाफ फोरम में परिवाद दायर किया। इसमें उसने कहा कि विपक्षी के प्रचार से प्रभावित होकर 3 मार्च 2011 को उसने अपने आलू को विपक्षी के कोल्ड स्टोरेज में रख दिया। विपक्षी ने कहा था कि उसके कोल्ड स्टोरेज में शीतलीकरण की अच्छी व्यवस्था है ऐऔ्र आधुनिक मशीनें भी लगी है। इसके बाद उसने 245 कट्टे निकाले जाने की सहमति बनी। अन्य कट्टे बाद में निकाले जाने की बात कही गई।
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परिवादी द्वारा इसके बाद जब नोटिस भेजा गया तो त्रुटिवश नोटिस में 250 कट्टा आलू निकलवाना अंकित हो गया। वर्ष 2012 परिवादी ने विपक्षी के कोल्ड से 250 कट्टा वारदाना प्राप्त किया। कोई लोन नहीं लिया। शेष आलू निकलवाने के लिए कोल्ड स्टोरेज जाने पर विपक्षी द्वारा उसे यह आश्वासन दिया गया कि वर्ष 2012 के लिए वारदाना ले जाओ। जब आलू लेने आओगे तो उसी समय पिछले साल का पेमेंट कर देंगे।

जब परिवादी ने आलू का पेमेंट करने को कहा तो परिवादी ने आलू सडने की बात कही और यह भी कहा कि न को आलू देंगे और न ही धनराशि देंगे। इसकी शिकायत जब मालिकों से की गई तो मालिकों ने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कोल्ड से बाहर निकलवा दिया। यह भी कहा कि यदि आगे आए तो गोली मार दी जाएगी। इस पर परिवादी ने फोरम में वाद दायर किया।
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दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फोरम के अध्यक्ष सतीश चंद शर्मा व सदस्य सुधीर कुमार ने परिवाद स्वीकार करते हुए कोल्ड स्टोरेज के मालिक/प्रबंधक को आदेश दिया है कि वह परिवादी को कोल्ड में भंडारित किए गए गए आलू के शेष 360 पैकिटों की कीमत 200 रुपये प्रति पैकिट के हिसाब से 72 हजार रुपये 7 फीसदी वार्षिक ब्याज के दर से परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक निर्णय की तिथि से तीस दिन के अंदर नियमानुसार अदा करे। मानसिक व शारीरिक व आर्थिक क्षति हेतु पांच हजार और परिवाद व्यय हेतु दो हजार रुपये भी अदायगी करे। परिवादी की ओर से दिनेशचंद टीटू ने पैरवी की।
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