ब्यूरो अमर उजाला, हाथरस।
हींग कारखाने में काम करने वाले नगला बेलनशाह के मोहन का हाथ नौ मई को मशीन की चपेट में आ गया। डॉक्टरों को उसकी एक अंगुली काटनी पड़ी। मोहन का इलाज अभी भी जारी है। इलाज पर उसके गरीब पिता कर्ज लेकर 90 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। मोहन के वृद्ध पिता चंद्रपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिकायत कर कहा है कि श्रम विभाग के अधिकारियों ने उन्हें धमकाते हुए 15 हजार रुपये लेकर मामला खत्म करने को कहा है। वृद्ध ने कहा है कि न्याय नहीं मिलने पर वह डीएम कार्यालय के सामने आत्मदाह कर लेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी श्रम विभाग के अधिकारियेां और कारखाने के मालिक की होगी।
चंद्रपाल शर्मा ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि श्रम विभाग के अधिकारी ने छह जुलाई को उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया था। यहां कारखाने के मालिक भी मौजूद थे। उनके सामने अधिकारी ने चंद्रपाल को हड़काया और कहा कि कारखाने के रिकॉर्ड में मोहन का नाम दर्ज नहीं है, जबकि मोहन पिछले दस साल से हींग के कारखाने में काम कर रहा था। अधिकारी ने यह भी कहा कि विभाग के रिकॉर्ड में भी मोहन का नाम नहीं है। इसके बाद चंद्रपाल को 15 जुलाई को आने को कहा गया। विभाग के अधिकारी ने कहा कि उनकी कारखाने के मालिक से बात हो गई है।
15 हजार रुपये वह दे सकते हैं। इससे ज्यादा नहीं मिलेगा। आपको जो करना है, वह कर लें। चंद्रपाल को काफी भला-बुरा कहा। चंद्रपाल ने कहा है कि कारखाना मालिक श्रम विभाग के अधिकारियों से मिले हुए हैं, इसलिए मजदूरों का रिकॉर्ड कारखानों और विभागों में दर्ज नहीं किया जाता। चंद्रपाल ने कहा है कि सूबे की योगी सरकार गरीबों को न्याय दिलाने की बात कहती है, इसलिए उन्हें संपूर्ण हर्जा-खर्चा व मजदूरी कंपनी एक्ट के अनुसार दिलाई जाए। चंद्रपाल ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो गरीब मजदूर को उसका हक नहीं मिल सकेगा। ऐसे में वह जीकर क्या करेगा और आत्मदाह कर लेगा।