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35 साल से हाथरस में जीत को तरस रही कांग्रेस

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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हाथरस लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस की हालत 35 साल से पतली है। हर बार चुनाव में नेता जीत की जुगत लगाते हैं, लेकिन निराशा हाथ लगती हैं। बीते दिनों प्रदेश नेतृत्व के नेताओं ने पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोली है। अब पार्टी आलाकमान जल्द प्रत्याशी की घोषणा करेगी। करीब 30 लोग उम्मीदवार बनने की लाइन में लगे हुए हैं।

वर्ष 1984 तक यहां कांग्रेस और उसके विरोधी दलों में टक्कर होती रही। इसके बाद पिछले 35 साल से कांग्रेस की हालत पतली है और वह फिर इस सीट पर जीत नहीं पाई। आजादी के बाद पहले दो लोकसभा चुनाव वर्ष 1952 और 1957 में यहां कांग्रेस के नरदेव स्नातक विजयी हुए। वर्ष 1962 में यहां आरपीआई के ज्योतिस्वरूप ने नरदेव स्नातक को पराजित कर दिया, लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचा और कोर्ट ने निर्वाचन शून्य कर दिया। इस सीट के लिए फिर 1965 में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में कांग्रेस ने फिर बाजी मारी। नरदेव स्नातक ने फिर रघुवीर सिंह निम को पराजित कर दिया।
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वर्ष 1967 में कांग्रेस प्रत्याशी नरदेव स्नातक ने चंद्रपाल शैलानी को हराया। उसके बाद अगला चुनाव वर्ष 1971 में हुआ। तब कांग्रेस (आई) के चंद्रपाल शैलानी ने करन सिंह वर्मा को पराजित किया। वर्ष 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर के चलते जनता पार्टी के प्रत्याशी रामप्रसाद देशमुख ने कांग्रेस (आई) के चंद्रपाल शैलानी को पटखनी दी। उसके बाद वर्ष 1980 में जनता पार्टी (एस) के टिकट पर चंद्रपाल शैलानी लड़े और उन्होंने कांग्रेस के डॉ. धर्मपाल को पराजित किया। वर्ष 1994 में इंका प्रत्याशी पूरनचंद्र यहां चुनाव मैदान में उतरे और बाजी मार ले गए। उन्होंने जनता दल के डॉ.बंगाली सिंह को मात दी।

अगला चुनाव 1989 में हुआ। कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हुए विपक्ष ने इस बार यहां से जनता दल के बैनर तले डॉ. बंगाली सिंह को उतारा। डॉ. बंगाली सिंह ने पूरनचंद्र को यह चुनाव हरा दिया। अगला चुनाव वर्ष 1991 में हुआ। भाजपा ने डॉ. लाल बहादुर रावल को अपना प्रत्याशी बनाया। रावल ने जनता दल के मूलचंद्र निम को चुनाव हरा दिया। उसके बाद तो भाजपा यहां से चुनाव जीतती चली गई। वर्ष 1996 में भाजपा ने प्रत्याशी बदल दिया।

किशनलाल दिलेर यहां से चुनाव मैदान में उतरे तो उन्होंने बसपा के रणवीर सिंह कश्यप को हराया। वर्ष 1998 में फिर चुनाव हुआ। भाजपा ने फिर दिलेर को मैदान में उतारा। इस बार बसपा ने गंगाप्रसाद पुष्कर को प्रत्याशी बनाया ,लेकिन पुष्कर फिर चुनाव हार गए। इसके अगले साल फिर 1999 में चुनाव हुआ। दिलेर फिर चुनाव लड़े और उनका मुकाबला फिर बसपा के ही गंगा प्रसाद पुष्कर से हुआ और दिलेर फिर जीते। वर्ष 2004 में भाजपा के प्रत्याशी तो किशनलाल दिलेर ही रहे, लेकिन बसपा ने प्रत्याशी बदल दिया।

उसने इस बार रामवीर सिंह भैयाजी को मैदान में उतारा, लेकिन फिर बसपा हार गई। वर्ष 2009 का चुनाव नए परिसीमन के आधार पर हुआ। भाजपा से गठबंधन के चलते यह सीट रालोद के खाते में आई और प्रत्याशी बनी सारिका सिंह बघेल। सारिका सिंह बघेल ने बसपा के राजेंद्र कुमार को हरा दिया। इस तरह पिछले 1996 से अब तक इस सीट पर भाजपा या उसके गठबंधन की बसपा से ही टक्कर होती रही है, लेकिन बसपा जीती एक भी बार नहीं है।
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कांग्रेस -लोकदल गठबंधन से वर्ष 2014 में निरंजन सिंह धनगर को प्रत्याशी बनाया। उनको 86 हजार 109 मत मिले। इस चुनाव में भाजपा के राजेश कुमार दिवाकर सांसद बने। कांग्रेस जिलाध्यक्ष करुणेश मोहन दीक्षित की मानें तो करीब तीस लोगों ने आवेदन किया है। प्रत्याशियों के चयन के लिए जिलाध्यक्ष व शहराध्यक्षों को दिल्ली बुलाया जाएगा। 17 से 20 मार्च के बीच हाथरस संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी।
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