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हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है मेला श्री दाऊजी महाराज

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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
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हाथरस। हाथरस के किला क्षेत्र में लगने वाला मेला श्री दाऊजी महाराज हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं सद्भावना का प्रतीक है। 106 साल से लगातार यहां श्री दाऊजी महाराज महोत्सव को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार 107 वां मेला आज (गुरुवार) गणेश चतुर्थी से शुरू होगा।

हालांकि मेले का औपचारिक उद्घाटन 15 सितंबर यानि बलदेव छठ से होगा। मेला श्री दाऊजी महाराज का प्रमुख आकर्षण विराट कुश्ती दंगल है। इसमें इस बार फिल्म अभिनेता गोविंदा व नामी पहलवान शिरकत करेंगे। गुरुवार को शहर के मंदिर श्री कामेश्वर से शुरू होकर वेद भगवान शोभायात्रा निकाली जाएगी, जोकि मंदिर श्री दाऊजी महाराज प्रांगण में पहुंचेगी।
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106 वर्ष पहले मेले की तहसीलदार ने कराई थी शुरुआत
श्री दाऊजी महाराज मंदिर का निर्माण यहां के राजा दयाराम ने कराया था। यह मेला 1912 में तत्कालीन तहसीलदार श्यामलाल ने लगवाया था। कहा जाता है कि श्यामलाल का बेटा बीमार हो गया था। उन्हें सपना आया कि वो दाऊजी महाराज की पूजा अर्चना के साथ किला क्षेत्र में मेले का आयोजन कराएं। ऐसा करने से उनका बेटा स्वस्थ हो गया। तभी से यहां प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन होता है। अब यह मेला दाऊजी महोत्सव के रूप में तब्दील हो गया है। यह मेला लगभग 20 दिन तक चलता है। जिसमें देश के कई बड़े बड़े कलाकार प्रतिभाग करते है।
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ध्वज फहराने के साथ मजार में चढ़ाई जाती है चादर
मेला श्री दाऊजी महाराज को लक्खी मेला के नाम से भी जाना जाता है। दाऊजी के मंदिर पर ध्वजा पताका फहराने के साथ काले खां की मजार पर चादर चढ़ाई जाती है। यहां तक कि मंदिर के साथ साथ मजार पर पुताई और साफ-सफाई होती है। दाऊजी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद चादर चढ़ाने के बाद देवछठ को विधिवत मेले का उद्घाटन होगा। इस मेला परिसर में एक छोर पर दाऊजी महाराज का मंदिर है तो दूसरी और काले खां की मजार है। सभी धर्मों के लोग मंदिर के दर्शन भी करते हैं तो मजार पर मत्था भी जरूर टेकते हैं।
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मंदिर की गुंबद में गोलों के निशान आज भी
लोगों की मानें तो अंग्रेजों ने श्री दाऊजी महाराज मंदिर पर वर्ष 1817 में तोप से गोले दागे थे, लेकिन इस मंदिर का कुछ न बिगाड़ सके। मंदिर के गुंबद में आज भी तोप के दागे गए गोलों के निशान हैं। वही मंदिर में एक गोला सुरक्षित रखा हुआ है। तीन गोले अभी मंदिर के गुंबद में फंसे हुए हैं।
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अब मेले ने ले लिया है राजनीतिक रूप
पिछले कुछ वर्षों से इस मेले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। प्रदेश में जिस पार्टी की सत्ता होती है। उस पार्टी के नेताओं की इस मेले में ज्यादा पकड़ होती है। जिला प्रशासन उन्हीं नेताओं के हिसाब से ज्यादातर मेले में आयोजित कार्यक्रमों का आयोजन कराता है।
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