न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
तीज का त्योहार हिंदू धर्म संस्कृति की जान है, इसलिए होलिका दहन का भी विशेष महत्व है। इसकी तैयारियों में भक्त और संस्थाएं जुट गई हैं। होलाष्टक शुरू होने से जहां शुभ कार्यों पर ब्रेक लग गया है। वहीं रंगोत्सव के आने से मन आनंदित होने लगा है। अब होली के बाद ही शुभ कार्य हो सकेंगे।
होलाष्टक लगने के बाद शुभ कार्य नहीं होते हैं, इसलिए पूजन और भक्ति को ही महत्व दिया गया है। होलिका दहन की रात्रि को जागरण का महत्व है। इसे दारुण रात्रि की संज्ञा दी गई है। आचार्य सीपू जी महाराज ने बताया कि होलाष्टक 14 मार्च को सूर्योदय के साथ रोहिणी नक्षत्र के साथ शुरू होंगे, जो 20 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होंगे।
इन दिनों में शादी विवाह, मुंडन, ग्रह प्रवेश सहित किसी भी तरह का कार्य नहीं किया जाता। पौराणिक मान्यता है कि इन दिनों में शुभ कार्य सफल नहीं होते हैं। अग्नि का भय रहता है। 21 मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी। होलिका पूजन के समय भद्रा नहीं होना चाहिए।