अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
इस साल बादल रूठ गए। एक जून से अगस्त तक के बारिश के आंकड़ों पर गौर करें तो अपने जिले में औसत से 65 फीसदी कम बारिश हुई है। कम बारिश वाले जिलों में 70 फीसदी कम बारिश के साथ आगरा पहले पायदान पर है और उसका पड़ोसी जिला हाथरस 65 फीसदी कम बारिश के साथ दूसरे नंबर पर है। इसके बाद गाजियाबाद है जहां औसत से 59 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।
औसत कम वर्षा को देखते हुए ही शासन इस जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने पर विचार कर रहा है। जिला प्रशासन से वर्षा के ताजा आंकड़े मांगे गए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में पहली बार ऐसा हुआ है, जब हाथरस में अगस्त तक सबसे कम बारिश दर्ज की गई है।
हाथरस जिले में एक जून से अगस्त के महीने तक औसत बारिश का आंकड़ा 502 मिलीमीटर बारिश का है। साल 2012 में एक जून से 31 अगस्त तक 367.60 मिमी बारिश हुई थी। साल 2013 में यह आंकड़ा बढ़कर 439 मिमी बारिश तक पहुंच गया। साल 2014 में जिले को सूखे का सामना करना पड़ा है और बादलों की बेरुखी के कारण केवल 199 मिमी ही बारिश ही हो सकी। साल 2015 में इसमे कुछ सुधार हुआ और 239.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। बीते साल भी हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन जुलाई महीने में हुई 384 मिमी बारिश के बदौलत यह आंकड़ा 501.3 मिमी बारिश तक पहुंच गया। इस साल बीते साल के मुकाबले एक तिहाई बारिश भी नहीं हुई है। इस बार एक जून से 31 अगस्त तक केवल 177.5 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है जो औसत 502.2 मिमी बारिश के आंकड़े से 65 फीसदी कम है।
फिलहाल शासन द्वारा वर्षा के आंकड़े मांगे जा रहे हैं, जोकि वहां भिजवा दिए गए हैं। जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय भी शासन स्तर से लिया जाना है।
- रेखा एस चौहान, अपर जिलाधिकारी हाथरस