न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। शासन स्तर से गांवों में स्वच्छता की हकीकत जानने के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण के तहत एक मोबाइल ऐप तैयार किया गया। इस ऐप के माध्यम से लोगों को अपने आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता को लेकर राय देनी थी। वही गांवों में ठोस और अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के बारे में भी इसी ऐप के माध्यम से ही फीडबैक देना था। विभागीय अधिकारियों ने इसे गांव तक पहुंचाने के लिए हजारों रुपये प्रचार-प्रसार मेें खर्च किए, लेकिन इस ऐप का वास्तविकता में गांवों तक पहुंचाने में असफल रह गए।
यहां तक कि जिले से लक्ष्य के सापेक्ष भी विभाग 27 दिनों में तीन हजार लोगों से ही वोटिंग की करा पाया था। अब विभाग ने अंतिम तीन दिनों में सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को लगाकर इस लक्ष्य को पाने की योजना बनाई है। यहां स्वच्छ भारत मिशन में लगे सभी कर्मचारियों ने अपने कार्यालय में बैठकर ही अपने मोबाइल फोन से ही फर्जी वोटिंग कर शासन का गांवों की स्वच्छता का फीड बैक भेज दिया।
जिले की ग्रामीण क्षेत्र की आबादी 12 लाख के सापेक्ष कम से कम 60 हजार लोगों को इस स्वच्छता सर्वेक्षण में अपना फीड बैक देना था। आखिरी तीन दिनों में विभाग के अधिकारियों को इस सर्वेक्षण की सुधि आई। उन्होंने आनन-फानन इस वोटिंग को पूरा कराने के लिए ब्लॉक और विभागीय कर्मचारियों के लक्ष्य निर्धारित कर दिए। प्रत्येक ब्लॉक को 8500-8500 वोटिंग और एसबीएम टीम को 12,500 वोटिंग कराने का लक्ष्य दिया गया। शासन के निर्देशों के अनुसार यह वोटिंग ग्रामीणों को जागरूक कराकर उनसे कराई जानी थी, लेकिन विभागीय कर्मचारियों ने बंद कमरे में बैठकर ही वोटिंग कर दी। शासन को भी इसका फीड बैक भेज दिया। अब इसी आधार पर शासन स्तर से जिले स्वच्छता का दर्जा दिया जाएगा।
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स्वच्छता सर्वेक्षण की वोटिंग विभागीय कर्मचारियों के साथ ग्रामीण स्तर से की जा रही है। गांवों में भी इस योजना का प्रचार-प्रसार किया गया है। ग्रामीणों में जागरूकता लाई गई है।
-एसपी सिंह, सीडीओ हाथरस