हाथरस। खारे और दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे इस जिले में गर्मी के मौसम में पानी के लिए जबर्दस्त हाहाकार मच सकता है। ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी बेशक पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भर है, लेकिन जिले में बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब पड़े हैं, लेकिन इन्हें चालू कराने का ख्याल सरकारी तंत्र को बिल्कुल भी नहीं है। जल निगम के सर्वे के मुताबिक जिले में खराब हैंडपंपों की संख्या 3,279 है, लेकिन निगम की मजबूरी यह है कि उसे अभी तक इन हैंडपंपों की रिबोरिंग और मरम्मत के लिए बजट ही नहीं मिला है। ऐसे में वह चाहकर भी इन हैंडपंपों को चालू नहीं करवा पा रहे हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही, वैसे ही ग्रामीण अंचल में इन हैंडपंपों के चालू नहीं होने से पानी की समस्या भी गहरा रही है।
नए हैंडपंपों के लिए भी सीएम ने सभी विधायकों को 100-100 नए हैंडपंपों का तोहफा देने की घोषणा तो की है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई शासनादेश जिला प्रशासन को नहीं मिला है। जिला लंबे समय से खराब और दूषित पानी की समस्या से लंबे समय से जूझ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि जिले में खराब पानी के यह जलस्रोत भी अब सूखने लगे हैं, जिससे आम आदमी को पानी पीने के लिए ही नहीं अन्य उपयोगों के लिए भी पानी मिलना मुश्किल होने लगेगा। जल निगम के रिकॉर्ड की ही बात करें तो जिले में वर्तमान में आम जनता की पानी की समस्याओं को दूर करने के लिए करीब 21 हजार इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगे हुए हैं, लेकिन इन हैंडपंपों में से जलस्रोत नीचा होने के कारण अधिकांश खराब हो चुके हैं। इन हैंडपंपों से अब आम आदमी को पीने और अन्य उपयोगों के लिए पानी ही नहीं मिल पा रहा है। पिछले एक साल से 3,279 इंडिया मार्का टू नल तो जल निगम के रिकॉर्ड में ही खराब पडे़ हुए हैं, जबकि जल निगम के आंकड़ों की सच्चाई को इसी से आसानी से समझा जा सकता है कि पिछले एक साल से इन खराब पडे़ हैंडपंपों की संख्या में कोई संसोधन ही नहीं हुआ है। इसका मतलब इनकी संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। दो दिन पूर्व जिला योजना की बैठक मेें पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने 4700 हैंडपंप खराब होने की जानकारी दी थी, जबकि इस अवधि में जिले में जल स्तर आठ से 15 फीट तक नीचे पहुंच गया है, जो खुद जल निगम का रिकॉर्ड ही बता रहा है।
-खराब हैंडपंपों की मरम्मत और नए हैंडपंपों के अधिष्ठापन के लिए जिला योजना में भी पैसा मांगा गया था, लेकिन न जिला योजना से पैसा मिला, न शासन से ही कोई बजट प्राप्त मिला है। बजट प्राप्त होगा तो हैंडपंपों की मरम्मत करा दी जाएगी।
-पीके खंडेलवाल, एक्सईएन जल निगम हाथरस