नए राजमार्गाें के निर्माण से जिले की वन संपदा लगातार घट रही है। मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में जिले में 19,472 पेड़-पौधों की पहले ही बलि चढ़ चुकी है। अब आगरा-अलीगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के लिए अभी तक 280 बड़े पेड़ों को कटान के लिए चिह्नित कर लिया गया है। यह संख्या और बढ़ सकती है।
जिले की सीमाओं के भीतर से आगरा-अलीगढ़, दिल्ली-कानपुर, मथुरा-बरेली राजमार्ग के अलावा यमुना एक्सप्रेस वे का भी कुछ हिस्सा गुजर रहा है। इन सड़कों के निर्माण से लोगों को आवागमन में तो आसानी हो गई है, लेकिन बड़े पैमाने पर जिले की हरियाली इनकी भेंट चढ़ गई है। वर्तमान में निर्माणाधीन मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से भी पर्यावरण के दृष्टिकोण से जिले में बड़ा नुकसान हुआ है।
जिले में इसके निर्माण के लिए कुल 8581 पेड़ और 10891 पौधों का कटान हुआ है। वर्तमान में इस राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास इस समय हरियाली दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। अब आगरा-अलीगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए भी पेड़ों का कटान किया जाना है। इसके लिए अभी तक जिले में 280 बड़े पेड़ों को चिह्नित कर लिया गया है। आने वाले समय में अभी और पेड़ों के कटान को स्वीकृति दी जानी हैं।
13.86 लाख नए पौधे रोपे जाएंगे
मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में बलिदान हुए करीब 19,472 पेड़-पौधों की भरपाई 13.86 लाख पौधे रोपकर की जाएगी। इसके लिए करीब 180 हेक्टेयर भूमि का चिह्नांकन किया जा रहा है। इसी तरह आगरा-अलीगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के लिए कटने वाले 280 पेड़ों की भरपाई 6.32 हेक्टेयर भूमि में 12,640 पौधों का रोपण कर किए जाने की योजना है। माना जा रहा है कि इन पौधों का रोपण सड़क किनारे व अन्य भूमि पर किया जाएगा।
जिले में है सिर्फ 1.30 फीसदी हरियाली क्षेत्र
भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2020 में वर्ष 2018 की अपेक्षा हरियाली में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जारी रिपोर्ट में सामने आया है कि हाथरस में कुल भौगोलिक वन क्षेत्र 1840 वर्ग किमी है, जिसमें बहुत अच्छे घनत्व के वन (ऐसा वन क्षेत्र, जिसमें आसमान सिर्फ 30 फीसदी या इससे कम दिखाई दे) बिल्कुल नहीं है। मध्यम घनत्व के वन (ऐसा वन क्षेत्र, जिसमें आसमान 70 फीसदी या उससे कम दिखाई दे) मात्र एक हेक्टेयर है। पूरा खुला हुआ वन क्षेत्र (ऐसा वन क्षेत्र, जहां से पूरा आसमान दिखाई दे) मात्र 22 हेक्टेयर है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट में हरियाली क्षेत्र का प्रतिशत मात्र 1.25 बताया गया है। वर्ष 2021 के लिए सामने आई भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भी वन क्षेत्र के प्रतिशत में कोई इजाफा नहीं हुआ है। वर्ष 2023 की रिपोर्ट में जिले का हरियाली क्षेत्र 0.05 फीसदी से बढ़कर 1.30 फीसदी हो गया है। अगर तेजी से पेड़ों का कटान न हुआ होता तो इसमें और इजाफा होता।
जनपद में वर्ष वार पौधरोपण की स्थिति
-वर्ष 2017 में 3.5 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2018 में 5.2 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2019 में 19 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2020 में 17.30 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2021 में 25.75 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2022 में 26.65 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2023 में 20.14 लाख पौधों का हुआ रोपण।
-वर्ष 2024 में 24.70 लाख पौधों का हुआ रोपण।