प्रशांत भारती, हाथरस।
जिले में विधवा पेंशन में एक सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है। हसायन ब्लॉक के एक गांव की 22 सुहागिन महिलाएं कागजों में विधवा बनकर लंबे समय से विधवा पेंशन ले रही थीं। इन्होंने अपने पति के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र दस्तावेजों के साथ लगा रखे थे। खुलासे के बाद प्रशासन में खलबली मच गई। इतना ही नहीं इसी गांव की 78 अपात्र महिलाएं विधवा पेंशन का लाभ ले रही थीं। खुलासे के बाद इन सभी की पेंशन पर विभाग ने रोक लगा दी है। विभाग अब इनसे रिकवरी करने की तैयारी में जुट गया है।
जिले में विभिन्न योजनाओं में फर्जीवाड़ा सामने आया है। अब जिला प्रोबेशन कार्यालय से मिलने वाली विधवा पेंशन में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हसायन ब्लॉक की ग्राम पंचायत पोरा में 450 लाभार्थियों को विधवा पेंशन दी जा रही थी। इन आंकड़ों पर अधिकारियों ने जब संदेह जताया और जांच पड़ताल कराई तो यह पता चला कि 22 सुहागिन महिलाएं कागजों में विधवा बनकर इस पेंशन का लाभ ले रही थीं। इन सभी अपने दस्तावेजों में फर्जी मृत्यु प्रमाण लगा रखे थे, जोकि उनके पतियों के हैं। इतना ही नहीं जांच-पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि 78 अपात्र महिलाएं भी विधवा पेंशन का लाभ ले रही थीं, जबकि कुछ की उम्र ज्यादा है, तो कुछ की आय मानक से ज्यादा है। इस गड़बड़ झाले को देख अधिकारी हैरान रह गए। जिला प्रोबेशन अधिकारी डीके सिंह ने इनकी पेंशन जारी करने पर तत्काल रोक लगा दी है।
बड़ा सवाल, कैसे बने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र
हाथरस। इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या कोई रैकेट इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था और इस तरह से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र आखिर कैसे बन गए। यदि इसकी गहनता से जांच हुई तो निश्चित रूप से कई बड़े अधिकारियों की गर्दन भी फंसेगी। साथ ही क्या यह फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र केवल विधवा पेंशन के लिए ही इस्तेमाल किए जा रहे थे या फिर इनका अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी इस्तेमाल किया जा चुका है।
वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले पेंशनार्थियों का सत्यापन कराया जाता है। गांव पोरा में 22 महिलाएं ऐसी निकलीं, जो कि सुहागिन हैं, लेकिन उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर पेंशन पाई है। इसके अलावा 78 अपात्र महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही थीं। इस सबकी पेंशन रोक दी गई है। अब रिकवरी की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
-डीके सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी