हाथरस। भारतीय स्थापत्य कला और देसी कारीगरी की मिसाल राजा दयाराम किला परिसर में स्थित लगभग 200 साल पुरानी पानी की टंकी की संरचना को अब नया जीवन मिलने जा रहा है। पुरातत्व विभाग ने उड़द की दाल, चूने और कंकड़ के मिश्रण से बनीं ऐतिहासिक दीवारों को संवारा जाएगा, जबकि उनके ऊपर रखी जर्जर लोहे की टंकी को हटवाया जाएगा।
मेला श्रीदाऊजी महाराज के आयोजन के बाद इसको ढहाने की यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारतीय मजदूरों व कारीगरों ने बिना किसी सीमेंट या आधुनिक पिलर के इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण किया था। उड़द की दाल, चूने और कंकड़ को पीसकर तैयार किए गए देसी मसाले से ईंटों की चिनाई की गई थी।
दो शतक बीत जाने के बाद भी ये दीवारें इतनी अभेद्य और मजबूत हैं कि आज भी जस की तस खड़ी हैं। हालांकि इसके ऊपर रखी विशाल लोहे की टंकी समय के साथ जर्जर हो चुकी है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से हटाया जाना तय किया गया है। संवाद
पुरानी पाइप लाइन आज भी चालू
इस ऐतिहासिक टंकी ने लगातार 190 वर्षों तक शहरवासियों की प्यास बुझाई है। सुरक्षा कारणों से लगभग 15 वर्ष पूर्व इस टंकी से जलापूर्ति बंद कर दी गई थी। इसके बावजूद टंकी से जुड़ी ऐतिहासिक चार नंबर पाइप लाइन आज भी पूरी तरह चालू है। इस पाइप लाइन को वाटर वर्क्स की नई टंकी से जोड़ दिया गया है, जिसके जरिये आज भी शहर के मेंडू गेट, नयागंज और घंटाघर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना प्राथमिकता
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी मथुरा नितिन प्रिय राहुल ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना विभाग की प्राथमिकता है। मेला श्रीदाऊजी महाराज का आयोजन संपन्न होने के तुरंत बाद जर्जर लोहे की टंकी को सुरक्षित तरीके से हटाने और उड़द की दाल व चूने के गारे से बनीं प्राचीन दीवारों को रासायनिक व तकनीकी प्रक्रिया से संरक्षित करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।