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महान डेयरी पर 2.5 फीसदी मंडी टैक्स माफ

Tue, 26 Apr 2016 11:59 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
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भूवेंद्र सेंगर
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हाथरस। शासन ने कृषि उत्पादन मंडी समिति हाथरस क्षेत्र में काम करने वाली सलेमपुर की महान डेयरी को ढाई फीसदी मंडी शुल्क में बड़ी रियायत दी है। मंडी टैक्स में मिली इस छूट से डेयरी के उत्पाद बेहद सस्ते हो जाएंगे और उसे दूसरे राज्यों के डेयरी उत्पादों से मुकाबला करने में भी आसानी रहेगी। जिले में हाल ही में लगे इस डेयरी संयंत्र को टैक्स में मिली यह छूट बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यही नहीं आम लोगों को भी इस डेयरी के उत्पाद जैसे दूध, दही, देसी घी, मक्खन आदि दूसरी कंपनियों के मुकाबले सस्ते दामों पर मिल सकेंगे।

शासन ने राज्य में बडे़ उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना के तहत यह कदम उठाया है। इस योजना में पांच करोड़ से अधिक लागत के प्रोजेक्ट्स को कई प्रकार की रियायतें देने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में देसी घी पर ढाई प्रतिशत का मंडी शुल्क है। इसकी वसूली मंडी समितियों द्वारा की जाती है। सभी कंपनियों से घी बाजार में भेजने से पहले ही पर्चा 9 आर कटवा लिया जाता है और उसके बाद ही उनके माल की डिलीवरी होती है। बिना 9 आर पर्चा लिए अगर कोई वाहन रोड पर पकड़ा जाता है तो निर्धारित वजन और रेट के अनुसार मंडी शुल्क वसूली के साथ ही मंडी शुल्क का 10 गुना या कम से कम दो लाख रुपये जुर्माना वसूला जाता है, जिससे कारोबारियों के लिए बिना मंडी शुल्क अदायगी के अपने माल को बाहर भेजना आसान नहीं रहता है। अब मंडी शुल्क से मुक्त होने के बाद महान डेयरी को बड़ा फायदा मिलेगा। मंडी शुल्क की चेकिंग के लिए उनके माल को रोका नहीं जाएगा।
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- शासन की पांच करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले उद्योगों को रियायतें देने की योजना है। इसी नीति के तहत हाथरस की महान डेयरी को मंडी शुल्क में रियायत से आच्छादित किया गया है।
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- ब्रजपाल सिंह, मंडी सचिव


दाल उद्योग पर कब होगी मेहरबानी
महान डेयरी पर तो सरकार ने मेहरबानी कर दी, लेकिन दाल कारोबारियों को इस बार भी निराशा ही मिली है। दूसरे राज्यों के सस्ते माल की चुनौती से जूझते हाथरस के दाल उद्यमी लंबे समय से दाल पर मंडी टैक्स में रियायत मांग रहे हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला है, जबकि दाल सबसे ज्यादा आम जरूरत की चीज है, लेकिन वर्तमान में महंगाई की मार से दाल आम आदमी की पहुंच से तेजी से दूर हो रही है। ढाई फीसदी मंडी शुल्क की वजह से हाथरस का दाल उद्योग दूसरे राज्यों के मुकाबले तेजी से पिछड़ रहा है। दिल्ली, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में दाल मंडी टैक्स फ्री है, जबकि यूपी में इस पर ढाई फीसदी शुल्क है, जिससे बाजार में हाथरस के माल की मांग भी घट रही है और यहां के दाल उद्योग पर ही संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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