अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
19 साल बाद जिला पंचायत में गैर बसपाई निजाम होगा। यही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा की इस जीत का असर क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ेगा। अब तक जिला पंचायत की सबसे ज्यादा मेहरबानी हाथरस, सादाबाद और सासनी तहसीलों पर रहती थी, लेकिन अब जिला पंचायत में सिकंदराराऊ क्षेत्र का दबदबा बढ़ेगा।
सिकंदराराऊ और हसायन ब्लॉक का ग्रामीण क्षेत्र जिला पंचायत के लिए अब इसलिए महत्वपूर्ण हो जाएगा, क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष ओमवती यादव इसी क्षेत्र की निवासी हैं और यहीं से चुनकर आती हैं।
20 साल पहले जब अलीगढ़ और मथुरा से अलग होकर हाथरस जिला बना तो यहां सबसे पहला जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा का बना। करीब एक साल तक जिला पंचायत में भाजपा का दबदबा रहा। उसके बाद यहां बसपा की हुकूमत का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब तक जारी था।
जिला पंचायत में अब तक बसपा के जो भी अध्यक्ष बने, वह मूलत: हाथरस, सासनी, सासनी और मुरसान ब्लॉक से ही ताल्लुक रखते हैं। लिहाजा इनके कार्यकाल में जिला पंचायत की सबसे ज्यादा मेहरबानी इन्हीं ब्लॉकों पर रही। हालांकि 2012 में जब पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा तो जिला पंचायत के एजेंडे में सिकंदराराऊ और हसायन ब्लॉक भी एकाएक महत्वपूर्ण हो गया। इस अवधि में जिला पंचायत की तरफ से सबसे ज्यादा काम इस विधानसभा क्षेत्र में आने वाले हाथरस, सिकंदराराऊ और हसायन ब्लॉक में ही हुए।
अब चूंकि पूर्व मंत्री सादाबाद से विधायक हैं, इसलिए जिला पंचायत का फोकस फिर से हाथरस, सादाबाद, सहपऊ और मुरसान ब्लॉकों पर था, लेकिन अब निजाम बदलने के साथ ही जिला पंचायत की प्राथमिकताएं भी बदल जाएंगी। सिकंदराराऊ और हसायन ब्लॉक पर फिर जिला पंचायत का ज्यादा ध्यान होगा।
निजाम बदलने के साथ ही जिला पंचायत में नई अध्यक्ष की मंशा पर ढलने का काम शुरू हो चुका है। अध्यक्ष ने जिला पंचायत के अधिकारियों से मिलकर उन्हें अपनी प्राथमिकताएं समझा दी हैं। आने वाले दिनों में जिला पंचायत की कार्यशैली पर भी इसकी छाप साफ नजर आएगी।