अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के तहत जुलाई का रिटर्न दाखिल करने की अवधि शासन ने बेशक 10 अक्तूबर तक बढ़ा दी है, लेकिन जीएसटी के ऑनलाइन पोर्टल की खामियां व्यापारियों का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहीं। पोर्टल पर रिटर्न फाइल करने में व्यापारियों को काफी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है।
एक-एक एंट्री को सेव करने में 10 से 15 मिनट का वक्त बर्बाद करना पड़ रहा है। ऊपर से सर्वर के ओवरलोड होने से टेंशन और बढ़ गई है। अधिकारियों की मानें तो चूंकि पूरे देश का एक ही सर्वर है, इसलिए पोर्टल पर काम करने में यह समस्याएं आ रही हैं। जीएसटी काउंसिल इसे सुधारने के लिए तेजी सेे काम करा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही पोर्टल पटरी पर लौट आएगा।
एक तो व्यापारी जीएसटी के जटिल प्रावधानों से पहले से ही परेशान हैं और दूसरे जीएसटी के ऑनलाइन पोर्टल ने उन्हें परेशान कर रखा है। हालात यह हैं कि व्यापारी अपना कामकाज छोड़कर रिटर्न दाखिल कराने के लिए वकीलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां समय दे रहे हैं, लेकिन घंटों तक जब रिटर्न की फीडिंग नहीं हो पाती तो वह उनका धैर्य जवाब दे जाता है।
गौरतलब है कि जीएसटी के जटिल प्रावधानों और पोर्टल की गड़बड़ियों को लेकर व्यापारी और अधिवक्ता पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वाणिज्य कर कार्यालय पर तो धरना-प्रदर्शन किया ही जा चुका है, सांसद को भी वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जा चुका है। बावजूद इसके पोर्टल पटरी पर नहीं उतरा है।
कर अधिवक्ता पीयूष गुप्ता की मानें तो पोर्टल पर एंट्री सेव करने में बहुत वक्त बर्बाद हो रहा है। एक-एक एंट्री सेव होने में 10 से 15 मिनट का समय लग जाता है। यही नहीं एक बार कोई एंट्री गलत फीड हो गई तो उसमें सुधार नहीं किया जा सकता। पोर्टल एक-दो घंटे के लिए ही काम करता है और फिर पूरे दिन ठप रहता है। एक-दो रिटर्न भी पूरे दिन में फाइल नहीं हो पा रहे। इन हालात में आखिर कैसे शत-प्रतिशत रिटर्न दाखिल हो पाएंगे।
चूंकि शासन ने अब जुलाई का रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी है, इसलिए पोर्टल जल्द ही सुचारु हो जाएगा। व्यापारी और अधिवक्ता धैर्य से रिटर्न फाइल करें।
- संजय कुमार, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर