अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
बाल कल्याण समिति/न्यायपीठ हाथरस ने अपने अथक प्रयासों से 100 दिन पहले बिछडी मासूम बालिका को उसके माता पिता से मिलवा दिया। बच्ची को पाकर माता पिता अत्यंत प्रसन्न हुए।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रितुरानी अग्रवाल ने बताया कि 28 मार्च को अपने घर के पास से खेलते हुए सात वर्षीय बालिका शिखा उर्फ रानी अचानक गायब हो गई थी। यह बालिका 400 किमी दूर उप्र के सीमांत जिले ललितपुर में लावारिस हालत में मिली, जिसको पुलिस ने बाल कल्याण समिति ललितपुर में प्रस्तुत किया।
बाल कल्याण ललितपुर ने इस बालिका को राजकीय बाल गृह आगरा में भेज दिया। आगरा की बाल कल्याण समिति ने उक्त बालिका की काउंसिलिंग कराई, जिसमें बालिका ने अपने पिता तथा ताऊ का हाथरस रेलवे स्टेशन के पास सिलाई का कार्य करना बताया। इसके आधार पर चाइल्ड लाइन आगरा के माध्यम से हाथरस शहर में संभावित कई स्थानों पर बालिका को ले जाकर उसके घर का पता करने का प्रयास किया गया, लेकिन घर का पता नहीं लग सका।
तब बाल कल्याण समिति हाथरस ने पूछताछ से मिले तथ्य एकत्रित कर बालिका की फोटो सहित प्रेस विज्ञप्ति जारी की तथा व्हाट्स एप, फेसबुक आदि पर इलेक्ट्रोनिक मीडिया के माध्यम से हर संभव प्रयास किए, जिसके फलस्वरूप बच्चे के माता पिता तथा संबंधियों का पता चला।
इसके बाद समन्वय स्थापित करके बालिका को राजकीय बाल गृह से बाल कल्याण समिति हाथरस लाया गया, जहां से उसके माता पिता के प्रपत्रों व प्रयासों से संतुष्ट होकर समिति ने बालिका को उसके जैविक माता पिता के सुपुर्द कर दिया। बालिका तथा उसके माता पिता व संबंधी एक दूसरे से मिलकर काफी खुश हुए। इस मौके पर नरेंद्र कुमार पचौरी, मतेंद्र सिंह गहलोत, विमल कुमार शर्मा, प्रतिष्ठा शर्मा, प्रवीन यादव, अरविंद कुमार, शिव प्रसाद गौतम, बनवारीलाल, सुमित कुमार आदि थे।