पिता की मौत के बाद मां सफाई करके दोनों बेटियों का पेट पाल रही थी। अचानक बिना कारण बताए उसे काम से निकाल दिया गया। अब बीमार मां के इलाज और घर के खर्च के लिए 13 साल की महक ने मंडलायुक्त से मदद की गुहार लगाई है। उसने कहा कि सर, मां को काम दिला दो, वरना हम भूखे मर जाएंगे।
यह मार्मिक दास्तान सीएल गांधी पार्क वाल्मीकि बस्ती निवासी महक की है। उसके पिता वरुण कुमार की करीब छह साल पहले मौत हो चुकी है। परिवार में महक, उसकी सात साल की छोटी बहन और मां निर्मला देवी हैं। कोई भाई या अन्य कमाने वाला नहीं है। पिता की मौत के बाद निर्मला देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने हाथरस नगर पालिका परिषद में आउटसोर्सिंग पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया। इसी आय से परिवार का गुजारा चल रहा था और दोनों बेटियों की पढ़ाई भी हो रही थी।
बिना कसूर काम से निकाला, डेढ़ साल से भटक रही मां
शनिवार को तहसील सदर में मंडलायुक्त ओपी आर्य को महक ने बताया कि उसकी मां पूरी निष्ठा और मेहनत से काम करती थीं। बैंक पासबुक में हर महीने वेतन मिलने का रिकॉर्ड है। इसके बावजूद उन्हें अचानक बिना कारण काम से हटा दिया गया। बीमार मां पिछले डेढ़ साल से अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। नगर पालिका से लेकर डीएम कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन काम नहीं मिला। परिवार किराए के मकान में रहता है। आय का कोई साधन नहीं होने से घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। महक ने बताया कि उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। महक की शिकायत सुन मंडलायुक्त ने डीएम को मामले में जांच के लिए निर्देशित किया है।