न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक एवं विजया बैंक के विलय के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ बैंक ऑफ बड़ौदा चक्की बाजार पर सभी बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
प्रांतीय सहायक महामंत्री बीएस जैन ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्णय से बैंक कर्मियों को कोई आश्चर्य नही हुआ, क्योंकि मौजूदा केंद्र सरकार के एजेंडे में बैंकों का विलय था, परंतु बैंकों के विलय से जनता का कोई हित नही होगा। मुख्य मुद्दा तो इस समय एनपीए है। बैंकों के खराब ऋणों की वसूली के लिए केंद्र सरकार कोई सख्त कानून नहीं बना रही है। बैंक कर्मी लंबे समय से खराब ऋणों की वसूली के लिए सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों में से 19 बैंकों को नुकसान में दिखाया जा रहा है। ऐसा नही है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक लाभप्रद नही हैं। सभी बैंक अच्छा लाभ कमाते हैं, परंतु इस लाभ में से खराब ऋणों के समायोजन के लिए प्रावधान किया जाता है और बैंकों को हानिप्रद कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि उक्त तीनों बैंकों का खराब ऋण 80,000 करोड़ रुपये है । विलय कर यह धन वसूल नही होगा।
आरएस पौरुष ने कहा कि केंद्र सरकार का बैंकों को विलय करने का निर्णय उचित नही है। बैंक कर्मी इसका विरोध एकजुटता के साथ करें। खराब ऋणों की वसूली के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए। इस मौके पर ओमप्रकाश, देवेंद्र कुमार, आलोक अरोड़ा, उमाशंकर जैन, अशोक कुमार शर्मा, नन्नूमल, इतवारी लाल, पुष्पांकर जैन, अजय सिंह, राहुल जैन, शैलेंद्र कुमार, महेंद्र कुमार, मुनेंद्र कुमार, यतेश गर्ग, केपी सिंह, सुनील कुमार मोती, गया प्रसाद, हरीशचंद्र राठौर, धर्मेंद्र कुमार एवं भूपेंद्र कुमार ने अग्रिम भूमिका अदा की।