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आजाद मुल्क में आज भी कई मामलों में चलता है अग्रेंजों के जमाने का कानून

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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
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हाथरस। देश को भले ही 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली हो, लेकिन आज भी आजाद मुल्क में अंग्रेजों के जमाने के कानून बदस्तूर जारी हैं। यहां तक कि उनके बनाए हुए कानून पर आज भी फैसले सुनाए जाते है। कानूनी सलाहकारों की मानें तो उस समय अंग्रेजों ने अपने देशकाल और परिस्थितियों के अनुरूप कानून बनाए थे, जिनसे उन्हें फायदा होता था। देशकाल और परिस्थितियों के आधार पर नए कानून बनाए जाने चाहिए और लगातार इनमें संशोधन भी किया जाना चाहिए।

हाथरस में ही आज भी सिंचाई खंड की न्यायालय में नार्थन इंडिया कैनाल एंड ड्रैनेज एक्ट -1873 के तहत मामलों की सुनवाई कर फैसले सुनाए जाते है। इस एक्ट के तहत किसान द्वारा नहरी पानी की चोरी करके अपने खेतों में काटने पर सजा का भी प्रावधान है। 1873 के एक्ट के तहत उक्त व्यक्ति को एक माह की सजा और 100 रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। इस न्यायालय में अब तक कई मामलों की सुनवाई की जा चुकी है।
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प्रदेश में कानून की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। प्रदेश में कानून की पकड़ को मजबूत करने के लिए नए कानूनों को बनाए जाने का काम चल रहा है। अंग्रेजों के जमाने के करीब 149 एक्ट आज भी पूरे प्रदेश में लागू है, जिनके आधार पर कई मामलों में फैसले भी सुनाए जा रहे हैं। इन कानूनों में संशोधन करने के लिए विचार विमर्श भी समय समय पर किया जाता है।

वर्ष 1995 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार उस समय में देश में चल रहे 550 कानूनों को अस्तित्वहीन मान चुकी है। इन एक्ट में सुधार और कुछ एक्ट को खत्म करने के लिए पहल भी की गई थी, जो कारगर साबित नहीं हो पाई , जिसके कारण इन एक्ट में फेरबदल भी नहीं हो सका। देश में कानून देशकाल और परिस्थितियों के आधार पर बनाए जाते है।


देश में भले ही लोकतंत्र हो, लेकिन अंग्रेजों की गुलामी के समय के एक्ट आज भी आजाद मुल्क के नुमाइंदों पर प्रयोग में लाए जा रहे है। देश में करीब 181 एक्ट अंग्रेजों के शासन काल के बदस्तूर जारी है, जबकि इन एक्टों से विभागों को खासा नुकसान भी उठाना पड़ता है। इन एक्टों से कई प्रदेशों को भी राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन इन एक्टों का अनुपालन किया जाना भी मुलाजिमों के लिए उतना ही जरूरी है।
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देश में कानूनों के संशोधन और नए कानूनों को बनाने की जरूरत है। उससे भी ज्यादा जरूरत कानून के संशोधन की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की है। सरकार को एक ऐसा केंद्र बनाना चाहिए। जहां से कानून के बदलाव व उससे संबंधी जानकारी आसानी मिल सके।
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हरीश शर्मा एडवोकेट , वरिष्ठ अधिवक्ता
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अंग्रेजों के समय में बने कानूनों का उस समय सख्ती से पालन किया जाता था। अब वर्तमान स्थितियों में कई नए कानून बनाने और उनका सख्ती से अनुपालन कराने की जरूरत है।
अमर सिंह चंदेल, वरिष्ठ अधिवक्ता
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