जिले में एक साल पहले हुए चर्चित डार्कजोन फर्जी नलकूप कनेक्शन घोटाले की जांच पूरी कर ली गई है। जांच के लिए निर्धारित की गई प्राइवेट कंपनी ने कुल 16 उपकेंद्रों पर निजी नलकूप कनेक्शनों का सर्वे पूरा कर लिया है, लेकिन कंपनी ने डाटा सिर्फ नौ उपकेंद्रों के नलकूप कनेक्शनों पर हुए सर्वे का ही सौंपा है। अभी सात और उपकेंद्रों के नलकूप कनेक्शनों की सर्वे रिपोर्ट मिलना बाकी है। रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में 1,154 निजी नलकूप कनेक्शन अवैध पाए गए हैं।
गौरतलब हो कि वर्ष 2016 में डार्क जोन में शामिल हाथरस जंक्शन के कई गांव में उपभोक्ताओं को बिजली अफसरों और कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी तरीके से नलकूप कनेक्शन दिए जाने का मामला उजागर हुआ था। इस घोटाले में पूर्व में भी कई अधिकारियों और कर्मियों का जिले से तबादला हो चुका है, लेकिन इस घोटाले की निष्पक्ष रूप से जांच कराए जाने की मांग उपभोक्ता कर रहे थे।
इस वजह से एसई प्रदीप अग्रवाल ने इन फर्जी नलकूप कनेक्शनों के सर्वे के लिए एक प्राइवेट कंपनी को अधिकृत किया था। करीब दो महीने तक चले सर्वे को इस माह पूरा कर लिया गया। कंपनी मै. प्रिनव जीआईएएस टेक्नोलॉजी प्रा.लि. ने सर्वेे का काम पूरा कर एसई प्रदीप अग्रवाल को सर्वे की रिपोर्ट सौंप दी है। एसई के मुताबिक रिपोर्ट में बताया गया है कि 33 केवी सलेमपुर, 33 केवी हाथरस जंक्शन, 33 केवी महौ, 33 केवी बिर्रा, 33 केवी सासनी टाउन, 33 केवी सासनी देहात, 33 केवी उपकेंद्र बिलखौरा, 33 केवी उपकेंद्र छौंडा, 33 केवी उपकेंद्र वाहनपुर के 11 केवी पोषकों पर स्थापित निजी नलकूप के किए गए जीआईएस सर्वे में कुल विद्युत चलित नलकूप संख्या 3112 में से 1154 नलकूप कनेक्शन यानि कि 37 फीसदी अवैध पाए गए हैं।
सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद एसई प्रदीप अग्रवाल ने एक्सईएन तृतीय खंड को निर्देशित किया है कि डार्क जोन में स्थापित इन अवैध नलकूपों के कारण शासकीय आदेशों की भी अवहेलना हुई है और अवैध रूप से जल का दोहन किया गया है। इन सभी अवैध निजी नलकूप संयोजन धारकों के खिलाफ विभागीय नियमानुसार कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाए। दुष्प्रयोजन विभागीय सामग्री की गणना कर सामग्री मूल्य, सर्विस कनेक्शन चार्ज, तथा अवैध रूप से प्रयोग की जा रही बिजली के कारण हुई आर्थिक क्षति के लिए दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई करते हुए आलेख आरोप पत्र एवं आख्या उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
38 अवैध कनेक्शनधारियों ने दिए शपथ पत्र
एसई प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद 38 अवैध नलकूप संयोजन धारकों द्वारा विभागीय कर्मियों के खिलाफ शपथ पत्र प्रस्तुत किए गए हैं, इसलिए संबंधित कार्मिक भी विभागीय सामग्री के दुष्प्रयोजन एवं अवैध नलकूप निर्गत करने में संलिप्तता, शिथिलता और दूषित कार्यप्रणाली के दोषी हैं। इन कर्मियों की जांच के लिए भी एसई ने एक्सईएन को निर्देशित किया है।