प्रसूता की मौत को लेकर सीएचसी का घेराव करते लोग।
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प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 108 और 102 एंबुलेंस सेवा की लाचार तस्वीर रविवार तड़के देखने को मिली। एंबुलेंस के अभाव में हाथरस जिले के कस्बा सहपऊ की सीएचसी में महिला ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
दुर्भाग्य की बात तो यह रही कि दोनों एंबुलेंस मौके पर खड़ी हुईं थीं, लेकिन कई बार प्रयास के बावजूद लखनऊ में फोन रिसीव नहीं हुआ। वहां से रेस्पांस न मिलने के कारण एंबुलेंस के पहिये थमे रहे और एक घंटे तड़पने के बाद महिला की मौत हो गई। प्रसूता की मौत से गुस्साई भीड़ ने रविवार सुबह सीएचसी का घेराव कर खूब हंगामा किया।
सहपऊ क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर निवासी रतन सिंह मेहनत-मजदूरी करता है।
वह जहारवीर बाबा के दर्शन के लिए गया हुआ था। उसकी पत्नी विनीता (30) को शनिवार शाम को प्रसव पीड़ा हुई। उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया। रतन के भतीजे मदन ने बताया कि तड़के तीन बजे एएनएम ने परिजनों से कहा कि विनीता की तबियत ज्यादा खराब है, इसे हाथरस ले जाओ। इस पर मदन और अन्य परिजनों ने 108 सेवा के लिए लखनऊ फोन लगाया।
सीएचसी परिसर में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा की दो गाड़ियां खड़ी हुई थीं। कई बार कॉल करने की बावजूद फोन रिसीव नहीं हुआ। इस पर परिजन अपने वाहन की व्यवस्था में जुट गए। सवा चार बजे इन लोगों ने गांव फोन कर एक गाड़ी का इंतजाम किया। गाड़ी में बैठाने के लिए परिजन विनीता को बाहर ला ही रहे थे कि बरामदे में उसकी डिलीवरी हो गई। इस दौरान काफी ब्लीडिंग भी हुई। विनीता ने बेटे को जन्म दिया। प्रसूता को गाड़ी में बैठाकर परिजन हाथरस के लिए चले ही थी कि उसने दम तोड़ दिया।
प्रसूता की मौत की सूचना पर सुल्तानपुर के ग्रामीण एवं उसके परिजनों ने सीएचसी का घेराव कर जमकर हंगामा किया। ग्रामीण अस्पताल कर्मियों पर भी लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। उनका यह भी कहना था कि सीएचसी पर रात में कोई डॉक्टर तैनात नहीं रहता। कोतवाली पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई एवं भीड़ को समझाकर शांत किया।