हरदोई। संडीला विधानसभा से लगातार 15 साल विधायक रहे अब्दुल मन्नान तीन बार बसपा सरकार में मंत्री रहे। कभी मायावती के खास लोगों में शुमार रहे मन्नान बसपा सरकार में दो बार कैबिनेट और एक बार राज्यमंत्री रहे। जिले में सपा के एक कद्दावर नेता से उनकी गहरी यारी है। हरदोई की सियासत में सितारे की तरह चमक रहे उस नेता को अब्दुल मन्नान ने ही बसपा में इंट्री दिलाई थी।
वर्ष 2012 के चुनाव के ऐन वक्त पहले उन नेता ने तो पाला बदल लिया लेकिन मन्नान बसपा में ही रहे। चुनाव में सपा की आंधी में मन्नान का सिंहासन पलट गया। सपा से चुनाव लड़े महावीर सिंह ने उन्हें बड़े अंतर से शिकस्त दे दी। कुछ दिनों तक तो मन्नान की बसपा के क्षेत्रीय कैडर कार्यकर्ताओं से छनती रही लेकिन धीरे धीरे उनका रुझान सत्ता पक्ष की ओर हो गया। इसी साल हुए एमएलसी चुनाव उन्होंने सपा प्रत्याशी का अंदर ही अंदर समर्थन किया था। ब्लाक प्रमुख चुनाव में उन पर अपने बेटे को प्रमुख बनाने के लिए सपा से एक तरह से डीलिंग हुई थी।
मन्नान का बेटा अब्दुल राफे बेहंदर से चुनाव मैदान में था जबकि संडीला ब्लॉक से मन्नान के मित्र सपा नेता सपा के अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में थे। संडीला से मन्नान पर अपने सपाई मित्र के चहेते और सपा के बागी प्रत्याशी कुंवर वीरेंद्र सिंह का समर्थन करने का आरोप लगा। चुनाव में मन्नान का बेटा और कुंवर वीरेंद्र सिंह दोनों जीत गए। तभी से बसपा प्रमुख की भ्रकुटी मन्नान पर तन गई थी। बुधवार को बसपा प्र्रमुख ने अब्दुल मन्नान और उनके पूर्व एमएलसी भाई अब्दुल हन्नान को पार्टी से बाहर कर दिया। क्षेत्र में हुए एक हत्याकांड ने भी मन्नान की काफी किरकिरी कराई थी। इसके अलावा उनके खिलाफ कई अन्य मामलों की शिकायतों बसपा आलाकमान तक पहुंची थीं।