फोटो 31: कार्यालय नगर पालिका परिषद बिलग्राम। संवाद
हरदोई। नगर पालिका बिलग्राम में अधिशासी अधिकारी के ही नहीं, कर्मचारियों के कारनामे भी सुर्खियों में हैं। ताजा मामला तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से निकाय कर्मी को ही ठेकेदार बनाकर भुगतान निकाले जाने का सामने आया है। भुगतान सहित अन्य अभिलेख भी निकाय से लापता होने की बात पता चली है। इस मामले में अधिशासी अधिकारी नीलाव शाल्या ने लेखाकार और निकाय कर्मी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
बिलग्राम के अधिशासी अधिकारी ने इस संबंध में अधिकारियों को आख्या भेजी है। अधिशासी अधिकारी ने कहा कि नगर पालिका के प्रधान लिपिक लेखाकार रुपेश खन्ना और सेवाप्रदाता से रखे गए निकाय कर्मी (अब नहीं, तत्कालीन कर्मी) पंकज त्रिपाठी ने सुनियोजित साजिश से तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से फर्जी पत्रावली तैयार कर ली। इसी फर्जी पत्रावली के माध्यम से अधिकारियों को गुमराह करके धोखाधड़ी कर भुगतान निकाला गया है। फर्जी पत्रावली पर प्रधान लेखाकार ने भुगतान की प्रविष्टि की है लेकिन अपने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। प्रधान लेखाकार ने पत्रावलियों, अभिलेखों का रख-रखाव भी सही प्रकार से नहीं किया जबकि भुगतान से संबंधित अभिलेखों का रख-रखाव का दायित्व लेखाकार का ही है।
अधिशासी अधिकारी ने कहा कि लेखाकार से पत्रावली और अभिलेख मांगे जाने पर देने में टालमटोल करते हुए उपलब्ध नहीं कराए हैं। उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर से फर्जी पत्रावली बनाने और तत्कालीन निकाय कर्मी को भुगतान किए जाने और जीएसटी कटौती न किए जाने पर लेखाकार रुपेश अंजाना और तत्कालीन निकाय कर्मी पंकज त्रिपाठी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कोतवाली में तहरीर दी है।
निकाय कर्मी को बियरर चेक से किए गए भुगतान
अधिशासी अधिकारी नीलाव शाल्या ने अधिकारियों और कोतवाली को दिए पत्र में कहा कि नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक निकाय कर्मी को बतौर ठेकेदार बनाकर कई बार में भुगतान किए गए हैं। कहा कि 21 मई 2025 को बियरर चेक संख्या-000259 से निकाय कर्मी पंकज त्रिपाठी को कुल 1,93,864 रुपये का भुगतान गुमराह कर किया गया है। इसमें जीएसटी की कटौती भी नहीं की गई। वहीं अन्य भुगतान में भी फर्जी हस्ताक्षर की आशंका जताई है।