पिहानी। रामपुर कोड़ा की नीलम ने पढ़ी लिखी लड़की-रोशनी घर की के स्लोगन को चरितार्थ कर दिखाया। बीएड डिग्री धारक नीलम ने सरकारी नौकरी की चाह छोड़कर जीविकोपार्जन के लिए कैंटीन संचालन का निर्णय लिया। सरकारी अस्पताल में कैंटीन का संचालन वह आत्मनिर्भरता और नारी सशक्तीकरण की मिसाल बन गईं हैं।
यहां पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पुराने भवन में रोशनी आजीविका स्वयं सहायता समूह की कोषाध्यक्ष नीलम पत्नी वेदपाल कैंटीन का संचालन करतीं हैं। बताया कि बचपन से ही मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा था। पढ़-लिख कर आत्मनिर्भर और महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम करनी थी। बीए की पढ़ाई के समय ही शादी कर दी गई। दो बच्चे हैं। 11 वर्ष की पुत्री और आठ वर्ष का पुत्र। नीलम ने शिक्षिका बनने की तमन्ना में 2016 में बीएड किया लेकिन, जद्दोजहद के बाद नौकरी नहीं मिली तो, मायूस होने व सिस्टम को कोसने के बजाय उन्होंने स्वयं सहायता समूह को सहारा बना लिया।
मई 2023 से सरकारी अस्पताल में कैंटीन चलाना शुरु कर दी। नीलम ने बताया कि थोड़ी बहुत खेती है। पति की सहायता से उसी से घर चल रहा था। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर की अन्य जरूरतों ने जब सर उठाया तो, घर चलाना मुश्किल होने लगा, तब कैंटीन शुरु की। कैंटीन से न सिर्फ उनकी तमाम जरूरतें पूरी हो रही हैं बल्कि, दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। (संवाद)
यह सेवाएं उपलब्ध हैं :
नीलम ने बताया कि उनकी कैंटीन में मरीजों व तीमारदारों को जो सेवाएं दी जा रही हैं, उनमें परहेजी खाना और थाल सबकी जरूरतें पूरी कर रही हैं। 50 रुपये की थाल में पांच रोटी, दो सब्जी, चावल और सलाद शामिल है। इसके अलावा समोसे, नमकीन बिस्किट और चाय की भी सेवा उपलब्ध है।
गुणवत्ता से समझौता नहीं :
समूह की अध्यक्ष उर्मिला ने बताया की कैंटीन पर मिलने वाली खानपान की सामग्री की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा रहा है।
बच्चों के लिए उपलब्ध कराती हैं गर्म पानी
नीलम नवजात शिशुओं और अन्य छोटे बच्चों के दूध के लिए पानी गर्म किए जाने का पैसा नहीं लेती हैं। बताया कि आर्थिक लाभ के अलावा समाज के प्रति कुछ कर्तव्य भी बनते हैं। पुण्य लाभ अर्जित करने का अवसर नहीं गंवाना चाहिए।