क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों को गेहूं का
समर्थन मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ दिलाने की मंशा जिले में
शुरुआती दिनों में धड़ाम होती नजर आ रही है। आलम यह है कि न तो बैनर लगे
हैं और न ही कांटा बांट पहुंचे हैं, जिससे अभी तक क्रय केंद्र केवल कागजों
में ही संचालित होते दिखाई पड़ रहे हैं।
जमीनी हकीकत के नाम पर
निर्धारित स्थानों पर सन्नाटा दिखाई दे रहा है। अफसर कहते हैं कि अभी गेहूं
की आवक नहीं है। कुछ दिनों में जब आवक होगी, तब तक सभी क्रय केंद्रों की
व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी, जबकि शुक्रवार को मंडी समिति के आंकड़ों
में करीब 2 हजार क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई और खुले बाजार में गेहूं
करीब 1375 रुपये प्रति क्विंटल बिका है।
मंडी में गेहूं की आवक के साथ ही
आढ़तें गुलजार होने को तैयार हो रही हैं, पर क्रय केंद्र किसानों को समर्थन
मूल्य दिलाने में फिलहाल पूरी तरह से बेजार लग रहे हैं। ज्ञात हो कि इस साल
सरकार द्वारा गेहूं के लिए समर्थन मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया
है।
जिला प्रशासन द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद को 92 क्रय
केंद्र खोलने एवं 2 अप्रैल से खरीद शुरू करने की बात कही गई थी। जिले में
सरकारी क्रय केंद्राें से गेहूं खरीद का लक्ष्य करीब 75500 एमटी रखा गया
है। 2 और 3 अप्रैल को क्रय केंद्रों से जिले में गेहूं का एक दाना भी खरीदा
न जा सका है।
गेहूं खरीद की नोडल एजेंसी के डिप्टी आरएमओ दिनेश कुमार कहते
हैं कि 2 और 3 अप्रैल को अवकाश पड़ने से खरीद नहीं हो सकी और क्रय
केंद्रों पर बैनर लग सके है। सोमवार तक सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी
और खरीद शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मंडी में संभवतया पुराना गेहूूं आ
रहा होगा, नया गेहूं आने की सूचना अभी नहीं मिली है।