खरीफ की फसलों पर पड़ी सूखे की मार से उबर न पाए
किसानों पर रबी की फसलों में मौसम अतिवृष्टि और ओलों के रूप में कहर बनकर
टूट पड़ा और किसानों को बर्बादी की डगर पर पहुंचा दिया। रबी की फसलों में
40 फीसदी के करीब उत्पादन गिरा है।
हालांकि, आंकड़े कृषि विभाग के प्रथम
दृष्टया क्राफ कटिंग सर्वे के हैं, पर माना जा रहा कि कमोवेश फाइनल सर्वे
रिपोर्ट इसी के आसपास रहेगी। गत वर्ष की अपेक्षा इस साल रबी की मुख्य
फसल गेहूं का उत्पादन 40 फीसदी गिरा है। पिछले वर्ष गेहूं का उत्पादन औसतन
35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, जो इस साल गिरकर करीब 22 क्विंटल प्रति
हेक्टेयर पर आ गया है।
इसी तरह गत वर्ष सूखे के चलते खरीफ की प्रमुख फसल
धान का उत्पादन भी करीब 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कम हुआ था, जिससे करीब
30 फीसदी उत्पादन में गिरावट आई थी। विभागीय जानकारों के अनुसार जिले में
हर साल औसतन 3.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसलें एवं करीब 1.5 लाख
हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ की फसलें किसान करते हैं।
मौसम की मार से
किसान तो लुट ही रहे है, साथ ही लगातार उत्पादन गिरने से कृषि महकमे में
चिंता के बादल छा रहे हैं। उधर, कृषि प्रसार भवन में केयास्क मशीन लगा
दी गई है, जो इंटरनेट से कनेक्ट रहेगी और इसके जरिए किसान आनलाइन साइटों से
मौसम, खाद और बीज आदि से लेकर खेती किसानी, कृषि उपज मूल्य बाजार आदि के
बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
मशीन को टेस्ट किया जा चुका है और
जल्द ही इसे चालू करने की बात डीडी कृषि ने कही है। उधर, उप कृषि निदेशक
बृजेश चंद्रा ने बताया कि पिछले साल करीब 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं
का औसत उत्पादन था, जो इस साल घटकर प्रथम दृष्टया सर्वे में 22 क्विंटल
प्रति हेक्टेयर रह गया।
खरीफ में भी करीब 30 फीसदी उत्पादन घटा था, इससे
किसानों को नुकसान हुआ, पर बिगड़ते मौसम बदलते हालात और गिरता उत्पादन
चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अबकी अच्छे मानसून की दुआओं के साथ
ही कम पानी वाली पद्धति से किसानों को श्रीपद्धति से धान की फसल के लिए
कार्ययोजना बनाई जाएगी।