फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: बेड के लिए घंटों स्ट्रेचर पर इंतजार तो कोई प्राइवेट अस्पताल जाने को मजबूर

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

हरदोई। मेडिकल कालेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड पहले ही वायरल और मलेरिया के रोगियों से भरा था, लेकिन रक्षाबंधन के दिन हुए सड़क हादसों ने लोगों की मुसीबत और बढ़ा दी। 24 घंटे के अंदर हुए हादसों में घायल 35 लोग जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, तो मरीजों को दो से तीन घंटे तक स्ट्रेचर पर रहकर ही बेड का इंतजार करना पड़ा।
जिला अस्पताल में 184 बेड हैं। मेडिकल काॅलेज के नए वार्डाें का निर्माण चल रहा है। इसके चलते अस्पताल में मरीज तो ज्यादा पहुंच रहे हैं, लेकिन बेड की संख्या कम है। रक्षाबंधन के दिन हुए सड़क हादसों के कारण बड़ी संख्या में मरीजों को या तो स्ट्रेचर पर लेटकर उपचार कराना पड़ा। घंटों इंतजार करने के बाद भी बेड न मिलने पर प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
विज्ञापन

केस: 1
सांडी थाना क्षेत्र के गांव सपहिया निवासी दीपक (18) सड़क हादसे में घायल हो गए थे। परिजन शुक्रवार को उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर बेड खाली न होने की बात बताई गई। इस पर परिजन दीपक को ई -रिक्शा से लेकर प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की बात कह कर चले गए।

केस: दो
शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के समैचीपुर निवासी अश्वनी की पत्नी नीतिमा (25) बाइक से गिरकर घायल हो गई। परिजन नीतिमा को लेकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। अश्वनी ने बताया कि उनका मरीज दो घंटे से स्ट्रेचर पर लेटा है और बेड नहीं मिल पा रहा है।
केस: तीन
सुरसा के पंडितपुरवा निवासी जगन्नाथ की पत्नी जनक दुलारी (55) को कई दिनों से बुखार आ रहा है। जगन्नाथ ने बताया कि अस्पताल में बेड खाली न होने के कारण उनकी पत्नी 30 मिनट से स्ट्रेचर लेटी है। स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरु कर दिया गया।
विज्ञापन


वर्जन
मेडिकल कॉलेज में भवन अभाव के कारण बेड की परेशानी हाे रही है। त्योहार होने कारण पिछले दो दिनों से सड़क हादसे में घायल लोगों की संख्या बढ़ी है। जिसकी वजह से कुछ परेशानी आई है। नया भवन हैंडओवर होने के बाद बेड की समस्या दूर हो जाएगी।
डॉ.जेके वर्मा
सीएमएस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें