हरदोई। पिहानी चुंगी से लखनऊ रोड पर खेतुई तक मार्ग निर्माण के प्रस्तावित कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर श्रेय लेने की होड़ लगी है। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल और सांसद जय प्रकाश के बीच इस कार्य की मंजूरी को लेकर पाला खिंचा हुआ है। पूरे मामले में ताजा जानकारी यह है कि उक्त मार्ग के निर्माण के लिए शासन स्तर से अब भी मंजूरी नहीं मिली है।
लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-731 की लंबाई 260 किलोमीटर है। इस मार्ग का पिहानी चुंगी से घंटाघर रोड होते हुए लखनऊ चुंगी और खेतुई तक का हिस्सा दो लेन का है। लखनऊ रोड से शहर में घुसने से पहले ही सड़क की दशा बेहद खराब है। पिहानी चुंगी से खेतुई तक के बीच की सड़क का चौड़ीकरण कराने के साथ ही इस पर डिवाइडर बनाए जाने के काम की मंजूरी का दावा किया जा रहा है। 10 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकार होेने को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची हुई है।
एक तरफ सदर विधायक और प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल हैं तो दूसरी तरफ सांसद जय प्रकाश। दोनों ने ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट से उक्त कार्य को मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। दोनों के ही आभार जताने पर दोनों जनप्रतिनिधियों के समर्थक भी लामबंद हो गए हैं। इसके बाद श्रेय लेने की होड़ सोशल मीडिया पर जंग में तब्दील होती नजर आई।
सांसद और मंत्री के दावों के बीच संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की। इस दौरान पता चला कि उक्त मार्ग के लिए शासन स्तर से अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। न तो इसका शासनादेश जारी हुआ है और न ही निर्माण कार्य कराने के लिए बजट। बावजूद इसके सोशल मीडिया पर श्रेय लेने की होड़ थमती नजर नहीं आ रही।
साढ़े चार साल एनएचएआई के हवाले रही सड़क, हो गई दुर्दशा
लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत हरदोई से लखनऊ के बीच की सड़क एनएचएआई के बरेली डिवीजन को सौंप दी गई थी। नौ सितंबर 2020 को यह सड़क लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड से एनएचएआई को चली गई थी। इसके बाद यह सड़क 23 जनवरी 2025 को फिर से प्रांतीय खंड को सौंपी गई। पूरी सड़क नहीं सौंपी गई बल्कि पिहानी चुंगी से खेतुई तक की 10 किलोमीटर लंंबाई वाला हिस्सा ही प्रांतीय खंड को सौंपा गया। लगभग साढ़े चार साल सड़क का हिस्सा एनएचएआई के पास रहा लेकिन सड़क की स्थिति बेहतर होने की बजाए इसकी दुर्दशा हो गई।
31 मार्च को ईएफसी से मिली थी मंजूरी
लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पिहानी चुंगी से खेतुई तक की सड़क का आगणन बन चुका है। कुल 71 करोड़ 27 लाख सात हजार रुपये का आगणन बना है। यह आगणन 19 मार्च 2025 को शासन भेजा गया था। 31 मार्च 2025 को इसकी इवैलुएट फाइनेंस कमेटी (ईएफसी) यानी मूल्यांकन प्रभाग विभाग से मंजूरी भी दी जा चुकी है। इसके बाद से अभी तक मार्ग निर्माण के लिए न तो कोई शासनादेश जारी हुआ है और न ही बजट।
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बात 16 अक्तूबर 2024 की है। कलक्ट्रेट सभागार में दिशा (जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति) की बैठक हुई। बैठक में शामिल होने पहुंचे सांसद ने लोक निर्माण विभाग के कार्याें की समीक्षा के दौरान अभियंताओं से सवाल कर दिया। पूछा कि जिला मुख्यालय तक जाने वाली सड़क में इतने गड्ढे हैं, जनता कब तक दर्द झेलेगी। अभियंताओं ने लाचारगी जताते हुए बताया था कि सड़क एनएचएआई के पास है। लोक निर्माण विभाग कुछ नहीं कर सकता। तत्कालीन डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने सड़क के इस हिस्से को वापस पीडब्ल्यूडी को देने के लिए कहा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी कर 23 जनवरी 2025 को सड़क वापस पीडब्ल्यूडी को मिली। इसी बीच आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने सड़क के इस हिस्से को चौड़ा करने और डिवाइडर बनवाने को लेकर एक प्रस्ताव शासन को भेजा। मामला राज्य सरकार से जुड़ा था तो उनके पत्र का संज्ञान भी लिया गया। इसी दौरान सांसद जय प्रकाश ने भी तत्कालीन डीएम एमपी सिंह से मिलकर सड़क को चौड़ा कराने का प्रस्ताव दिया। साथ ही सांसद ने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों का नतीजा यह हुआ कि सड़क निर्माण के लिए एस्टीमेट और प्रस्ताव शासन तक पहुंच गया। अब मंजूरी का इंतजार है लेकिन श्रेय लेने की होड़ अभी से लगी है।
शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। 71 करोड़ 27 लाख रुपये का प्रस्ताव है। 10.50 किलोमीटर लंबाई में काम होना है। शासन से स्वीकृति अपेक्षित है। -राज कुमार मौर्य, अधिशासी अभियंता