राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के स्थापना दिवस जिले
के पदाधिकारियों ने गुरुवार को संकल्प दिवस के रूप में मनाया। राज्य
कर्मचारियों ने समस्याआें का निस्तारण न होने पर संघर्ष करने का संकल्प
लेते हुए कलक्ट्रेट परिसर तक जुलूस निकाला।
राज्य कर्मियों ने केंद्रीय
कर्मियों की भांति भत्ते देने की मांग करते हुए 10 सूत्रीय मांग पत्र
मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। केंद्रीय
कर्मियों की भांति सभी भत्ते देने की मांग करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त
परिषद ने जुलूस निकाला।
संगठन के स्थापना दिवस को संकल्प दिवस के रूप में
मनाते हुए जिला संयोजक अवधेेश कुमार सिंह ने कहा कि कर्मचारियों को वर्ष 08
से षष्टम वेतन आयोग का आंशिक लाभ प्रदान किया गया, पर भत्तों में केंद्र
से समानता नहीं दी गई। कर्मचारियों का मकान किराया भत्ता ग्रेड वेतन के
आधार पर स्वीकृत किया जा रहा है, जबकि महंगाई दर दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।
जिला
संयोजक बलराम बाजपेयी ने कहा कि केंद्रीय कर्मियों की भांति समस्त भत्तों
में समानता दी जाए और नई पेंशन व्यवस्था को बंद कर पुरानी पेंशन व्यवस्था
बहाल की जाए। ग्रेच्युटी की सीमा 15 लाख रुपये करने तथा राज्य कर्मचारियों
को 300 दिवसों के अर्जित अवकाश के स्थान पर 600 दिवस का अवकाश एवं नगदीकरण व
व्यवस्था देने को बहाल किया जाए।
सभी की अधिवर्षता 62 वर्ष करने की मांग
भी की। जिला संयोजक जेएन तिवारी ने कहा कि सचिवालय, पुलिस की भांति कैसलेस
चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की जाए। पदाधिकारियों ने मांगों के लिए संघर्ष
करने का संकल्प लेते हुए अन्यथा की स्थिति में शासन को चेतावनी दी।
इस
मौके पर शिव गोपाल सिंह, नवीन सहगल, सिद्धार्थ प्रभाकर, विजय सिंह, राम
नरेश द्विवेदी, बाबू सिंह, प्रभा सिंह, सुमन देवी, महावीर प्रसाद, नरेंद्र
बहादुर सिंह, लालचंद्र कुरील, डा. केपी कनौजिया, डा. वीके तिवारी आदि मौजूद
थे।