हरदोई। बुखार का बढ़ता हमला गर्भस्थ शिशुओं के लिए भी खतरा बनने लगा है। जिला महिला अस्पताल में हुई जांच में दो महीने में 140 गर्भवती महिलाएं मलेरिया और टाइफाइड पॉजिटिव मिलीं हैं। गर्भवतियों के बीमार रहने से गर्भ में पल रहे शिशुओं को भी बीमार का खतरा बढ़ गया है।
जिले में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड ने लोगों को चपेट रखा है। जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में रोज सैकड़ों मरीज पहुंच रहे हैं। आए दिन बुखार और डेंगू से किसी न किसी की मौत हो रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग केवल कागजी खानापूरी कर रहा है।
अब तो आशा और एएनएम की निगरानी में रहने वाली गर्भवती महिलाएं भी मलेरिया व टायफाइड की चपेट में आने लगी हैं। जिला महिला अस्पताल की पैथोलॉजी में अगस्त से अक्टूबर तक हुई जांच में 72 गर्भवती मलेरिया और 68 टायफाइड से पॉजिटिव मिलीं।
जुलाई में 15 गर्भवती में मलेरिया व 32 में टाइफाइड की पुष्टि हुई। इसी तरह अगस्त में मलेरिया के 38 व टाइफाइड के 28 तथा 12 अक्तूबर तक 11 गर्भवती महिलाओं को मलेरिया व 8 में टाइफाइड की पुष्टि हुई। जुलाई से अब तक 68 गर्भवती टाइफाइड व 72 मलेरिया की चपेट में आ चुकी हैं।
गर्भवती महिलाओं के मलेरिया व टाइफाइड क ी चपेट में आने से गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बीमारी की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। जिला महिला अस्पताल प्रभारी सीएमएस डॉ. रवींद्र का कहना है कि बुखार शुरू होेते ही अगर बेहतर इलाज करा लिया जाए तो गर्भस्थ शिशु पर कोई असर नहीं आता।
लेकिन बुखार लगातार कई दिन रहे और ठीक से इलाज न कराया जाए तो गर्भस्थ शिशु को भी मलेरिया, टायफाइड होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे गर्भस्थ शिशु की जान को खतरा हो सकता है।