टड़ियावां थाना जपरा गांव निवासी शंभू शुक्ला के गांव
मेें करीब दो दशक पहले विवाद चल रहा है। जिसके चलते शंभू शुक्ला और उसके
दो बेटों की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी। इससे शंभू शुक्ला की पत्नी
अपने चार अन्य बेटों को लेकर कोतवाली देहात के मुरलीगंज गांव में जाकर बस
गई थी।
गांव में खेती और मकान होने के कारण उसके बेटे समय समय पर उसकी
देखभाल के लिए जपरा जाते रहते थे। छह माह पूर्व बबलू और श्रीकृष्ण ने एक
गांव निवासी रामभरोसे की जमीन धोखे से ले ली थी। जिसकी जमीन वापस करने के
लिए कौशल आदि दबाव बना रहे थे।
उसी रंजिश में उसके बेटे नवल किशोर की पांच
अगस्त को गोली मार कर घायल करने के बाद लाठी-डंडों से पीट पीट कर हत्या कर
दी थी। जिसमें बबलू सहित सात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई थी,
जिसमें पुलिस ने बबलू और लल्लन को उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
उसी का बदला लेने के लिए बबलू की कौशल ने गोली मार कर हत्या करने का प्रयास
किया। उधर, हत्या के आरोपी को पेशी पर ले जा रहे सिपाही सुरेंद्र प्रताप
के साहस के कारण आरोपी मौके पर पकड़ा गया। पेशी पर जा रहे कैदी को जैसे ही
हमलावर ने गोली मारी। साथ चल रहे सिपाही सुरेंद्र ने उसे धर दबोचा।
इसके
अलावा उसके पास से दो तमंचे छीन लिए। सिपाही के साहस को देख भीड़ ने भी
साथ दिया और आरोपी की पिटाई कर दी। उधर, कचहरी आने वाले बंदियों की सुरक्षा
व्यवस्था की एक बार फिर पोल खुल गई। इससे पूर्व भी इसी क्षेत्र से पेशी पर
जाते समय करीब पांच से छह बंदी भाग चुके है।
वहीं हवालात में बंदियों के
साथ हाथापाई भी हो चुकी है। इसके लिए कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त
करने की कवायद भी हुई थी और वहां पर चौकी भी स्थापित है। इसके बाद भी
कचहरी में अवैध असलहे लेकर लोग बेरोकटोक घुस रहे हैं और वारदात को अंजाम दे
रहे हैं।