हरदोई। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी वूमेन) ने दो दोषियों को अजन्मे शिशु की मौत का दोषी माना है। उनको छह-छह वर्ष की सजा सुनाई है। इसी के साथ दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अतरौली थाना क्षेत्र के गांव निवासी राज बहादुर तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि 20 जून 2011 करे साधुराम और शिवमूरत ने सार्वजनिक निकास खड़ंजा को बांस बांधकर बंद कर दिया था। रास्ता खोलने को लेकर उसकी गर्भवती पत्नी शन्नो ने दोनों से कहा था। इस पर दोनों ने शन्नो को लात-घूसों व डंडों से पीटा था। इससे शन्नो को चोटें आईं थीं। इससे शन्नो के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई थी।
राज बहादुर की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। इसकी सुनवाई यहां न्यायालय में चल रही थी। अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता अमलेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों ने एक अकेली गर्भवती स्त्री को पीटा। इस कारण उसका गर्भपात हो गया। दोषियों द्वारा ऐसा कृत्य किया गया इससे एक अजात शिशु की मृत्यु हो गई। दोनों को अधिक से अधिक सजा दी जाए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जज हेमेंद्र कुमार ने साधुराम व शिवमूरत को छह-छह वर्ष की सजा सुनाई है। दोषियों को पुलिस अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया है।