ट्यूबवेल से खेतों की सिंचाई तो होती ही है, पर नदी
को भरने के लिए ट्यूबवेल का प्रयोग अजूबा लगता है। ऐसा ही नजारा नीर गांव
में देखने को मिला। गर्मी के मौसम में विगत तीन वर्षों से सूख रही सई नदी
को भरने के लिए एक व्यापारी नेता ट्यूबवेल द्वारा नदी में पानी छुड़वा रहे
हैं।
उनका मानना है कि इससे नदी भले ही न भरे, पर नदी के आसपास घूम रहे
जानवरों को पानी अवश्य मिलेगा। सदर तहसील क्षेत्र में नीर गांव से
गुजरी सई नदी मेें गर्मी शुरू होते ही पानी कम हो गया था। धीरे-धीरे यह नदी
पूरी तरह सूख गई।
जिसके चलते इस नदी के आसपास विचरण करने वाले जानवरों को
पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। क्षेत्र के जानवरों को पानी के लिए
व्यापारी नेता अचल अग्रवाल इस क्षेत्र में नदी किनारे स्थित अपने डिग्री
कालेज में एक ट्यूबवेल लगाकर उसका पानी नदी में छुड़वाना शुरू कर दिया है।
उनका कहना है कि बिजली की सप्लाई के अनुसार वह ट्यूबवेल को चलवाकर उसका
पानी नदी में छोड़ रहे हैं। अनुमान है कि करीब 10 से 12 घंटे प्रतिदिन
ट्यूबवेल चलने से उसका पानी नदी में जाने लगा। मंगलवार को मौके पर देखा तो
नदी के बीच में पानी भरा था, जिसे पशु पक्षी पीते नजर आए।
हालांकि, सूखी
नदी को पानी की अधिक जरूरत है, लेकिन ट्यूबवेल से जाने वाले इस पानी से
पशु-पक्षियों को जरूर राहत मिल रही है। ज्ञात हो कि अमर उजाला ने 10 जून के
अंक में धूप की तपिश से सई नदी समेत तालाबों के सूखने की खबर का प्रकाशन
किया था।
इसके बाद अभी तक प्रशासन के स्तर से कोई हलचल तो नहीं हुई, पर
सामाजिक संगठनों ने जरूर पहल करनी शुरू कर दी है। उधर, तेज धूप के चलते
पहले से ही सूख रहे तालाबों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने लगी हैं।
क्षेत्रीय
बाशिंदे रामसरन, नंदू, प्यारेलाल, रामआसरे और कुसुमा देवी आदि का कहना है
कि गत वर्ष सूखा पड़ने के कारण तालाबों की स्थिति पहले से ही खराब थी, इस
बार अभी तक बारिश न होने से पानी का संकट भी गहरा गया। उनके गांव में लगे
हैंडपंप भी सूख रहे हैं। गांव से गुजरी माइनर में अर्से से पानी नहीं छोड़ा
गया।