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Hardoi News: सरकारी नलकूप की कहीं फुंक गई मोटर तो कहीं नालियां हुई जर्जर

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फोटो-17- हूंसेपुर में बंद पड़ा नलकूप - फोटो : HARDOI
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हरदोई। किसानों पर सर्दी के मौसम में दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां कड़ाके की ठंड और पाले से दलहन और तिलहन की फसलें आठ से 10 फीसदी तक खराब हो चुकी हैं। वहीं अब इन फसलों को बचाने के लिए सिंचाई की जरूरत है, मगर सरकारी नलकूप दगा दे गए हैं। इनकी मोटर फुंकी पड़ी हैं। वहीं खेतों तक नहरों का पानी ले जाने वाली नालियां भी सफाई न होने से बंद हैं। इससे किसान परेशान हैं।
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सरकारी नलकूप सिर्फ कागजों पर ही चलते नजर आ रहे हैं। कहीं तकनीकी फाल्ट के कारण नलकूप बंद पड़े हैं। तो कहीं उनकी मोटर फुंक चुकी हैं। इसके चलते सैकड़ों बीघा फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
नहरों की बात करें तो किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इनकी नालियां बंद पड़ी है। पानी कम छोड़े जाने के कारण पंप लगाकर किसानों को अपने खेत सींचने पड़ते हैं।
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परेशान किसानों का कहना है कि पहले पाले से और अब पानी नहीं मिलने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। स्वयं के संसाधनों से फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है। फसल की सिंचाई के लिए निजी बोरिंग वालों को प्रति घंटा 200 रुपये के हिसाब से देना पड़ता है।
अहिरोरी ब्लॉक के हूसेपुर ग्राम सभा में यह सरकारी नलकूप लगा है। इससे 500 बीघा का क्षेत्रफल सिंचित करने की व्यवस्था है। यहां छह माह पहले पाइप फट गया था। इसके बाद से किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार इस बात से पूरी तरह से अनजान हैं।
बाजीदपुर रजबहे से निकला माइनर बंद पड़ा है। इससे करीब 25 वर्षों से किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि माइनर की नाली अधिक ऊंचाई पर बना दी गई है। इस कारण पानी नहीं पहुंच पा रहा है। धीरे-धीरे यह नाली भी टूट गई है, लेकिन कोई इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
कबूलपुर के नाम से अहिरोरी ब्लॉक क्षेत्र में सरकारी नलकूप लगा है। इसका पंप दो माह पहले फुंक गया था। इससे किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा लाभ नहीं मिल रहा है। पहले यहां ट्रांसफार्मर नहीं लगा था। अब ट्रांसफार्मर रखवाया गया है। इसके बाद भी यह नलकूप संचालित नहीं हो सका है।
सीतापुर मार्ग से गोंडा राव को जाने वाले मार्ग के किनारे का यह खेत है। यहां पर किसान ने अपना निजी ट्यूबेल लगा रखा है। जो आसपास के किसानों से प्रति घंटे 200 रुपये लेकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करा रहा है। यहां मुफ्त सिंचाई की सुविधा किसानों के लिए महज छलावा साबित हो रही है।
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