फोटो-33-21-जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर।
- आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने की थी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य और सीएमओ से बात
- आठ साल पहले 2.61 करोड़ रुपये से बना था ट्रामा सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। शहर से लगभग छह किलोमीटर दूर लखनऊ रोड पर स्थित ट्रामा सेंटर के संचालन की कवायद तेज हो गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ट्रामा सेंटर का संचालन करने के लिए कुछ मशीनें स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिए हैं। कर्मचारियेां की तैनाती भी कर दी गई है। अभी कुछ कर्मचारियों की तैनाती सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय से भी की जाएगी।
वर्ष 2016 में 2.61 करोड़ रुपये की लागत से लखनऊ रोड पर ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया था। मौजूदा आबकारी मंत्री और तत्कालीन स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल के प्रयासों से ट्रामा सेंटर का निर्माण हुआ था। शुरुआती कुछ दिनों तक ट्रामा सेंटर के संचालन की औपचारिकताएं पूरी की गईं, लेकिन फिर इसे मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके उपकरण तो ले लिए, लेकिन ट्रामा सेंटर का संचालन शुरु नहीं कराया। बीीते दिनों अमर उजाला ने इस मुद्ददे को प्रमुखता से उठाया, तो आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने इसका संज्ञान लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रोहताश कुमार और मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. जेविन विष्णु गोगोई से बात की। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने ट्रामा सेंटर परिसर का जायजा लिया। आनन फानन ही सीएमओ ने इसका रंग रोगन भी करा दिया। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूर्व में ट्रामा सेंटर से लिए उपकरण भी वापस कर दिए हैं। साथ ही यहां कर्मचारियों की तैनाती भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने की है। फौरी तौर पर 14 स्टाफ नर्स ट्रामा सेंटर में तैनात की गई हैं अभी तक यह स्टाफ नर्स मेडिकल कॉलेज के अलग अलग वार्डाें में तैनात थीं। उधर दूसरी ओर चिकित्सकों की तैनाती सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज से किए जाने की कवायद भी चल रही है।
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पांच वेंटीलेटर और अल्ट्रासाउंड मशीन भी मिली
सीएमओ डा. रोहताश कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज ने उपकरण वापस किए हैं। इन उपकरणों में पांच वेंटीलेटर, अल्ट्रासाउंड मशीन, आईसीयू बेड, ओटी टेबिल, अपकटर, ऑक्सीजन सिलिंडर आदि शामिल हैं। कुछ बेड भी उपलब्ध कराए गए हैं। पूरी उम्मीद है कि एक सप्ताह के अंदर ट्रामा सेंटर का संचालन शुरू हो जाएगा। सारी व्यवस्थाएं तो एक साथ नहीं शुरु हो सकतीं, लेकिन प्रयास है कि संचालन हर हाल में शुरू हो जाए।