मानसूनी बारिश ने खरीफ की फसल को आक्सीजन दे दी। बीते
दिनों हुई मूसलाधार बारिश से खेत पानी से लबालब हो गए। सोमवार को किसान
खेतों को कहीं पर संभालते तो कहीं पर बेड़ लगाते नजर आए। सब कुछ ठीक ठाक
रहा तो इस बार खरीफ की फसल किसानों के आंसू पोछ देगी।
इधर, ग्रामीण
क्षेत्रों में कुछ एक केंद्रों को छोड़कर अधिकांश में धान और अन्य फसलों का
बीज किसान खरीदकर अब बुआई में लग गए हैं। सोमवार को मौसम पूरी तरह
खुलने के बाद किसानों ने मानसून की मेहरबानियों का पूरा लाभ उठाते हुए धान
की रोपाई को रफ्तार दे दी।
कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक हुई
बारिश हर तरह से फसलों के लिए लाभप्रद है। अगर कहीं पानी भराव की समस्या है
तो वहां पर धान की फसल के अलावा अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में
धान के अलावा अन्य फसलों के लिए किसानों को खेतों में जलभराव को नहीं होने
देना चाहिए।
उधर, मौसम वेधशाला के पर्यवेक्षक जयशंकर मिश्रा के अनुसार 15
वर्षों बाद पहली बार जुलाई के पहले पखवाड़े में 301 मिमी और 8 घंटों में
170 मिमी बारिश ने रिकार्ड बनाए हैं। उधर, इस बारिश से सबसे ज्यादा फायदा
धान की फसल को हुआ है, जिससे किसानों ने रोपाई को लेकर रफ्तार पकड़ ली है।
इसके अलावा मक्का, ज्वार तथा गन्ने की फसल के साथ सब्जियों व अन्य खरीफ
फसलों को लाभ मिला है।