ट्रेन से सफर करने वालों की तादाद दिनों दिन बढ़ रही
है। इसके मुकाबले ट्रेनों में यात्रियों का सफर कठिन होता जा रहा है। भीड़
बढ़ने से जनरल के डिब्बों में पैर रखने की जगह नहीं मिलती, तो यात्री सफर
पूरा करने को नियमों को भी तोड़ देते हैं।
इसके बावजूद प्रमुख ट्रेनों
में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ाने पर विचार नहीं हो रहा। बसों के किराए
में इजाफा होने के बाद ट्रेनों से सफर करने वालों की संख्या में वृद्धि हो
गई है। भले ही ट्रेन में लोगों को बैठने की जगह नहीं मिलती, पर मध्यम
वर्गीय और कम आय वाले लोग ट्रेन से ही सफर करते हैं।
अब यह है कि ट्रेनें
यात्रियों से खचाखच भरी रहती हैं। जिनमें सबसे अधिक भीड़ तो प्रमुख ट्रेनों
में रहती है। जिले से भी होकर गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनों में इतनी भीड़
होती है कि यात्रियों को बैठने का स्थान नहीं मिलता है। वैसे भी स्टेशन से
होकर गुजरने वाली ट्रेनों में पंजाब मेल, चंडीगढ़ मेल, लखनऊ मेल,
डुप्लीकेट, सद्भावना सहित कई ट्रेनों में जनरल के मात्र दो या चार डिब्बे
ही हैं।
चूंकि यह गाड़ियां लंबे रूट की हैं, तो यह पहले से ही भरकर आती
हैं, ऐसे में स्थानीय यात्रियों को बैठना तो दूर पैर रखने को स्थान नहीं
मिलता है। ऐसे में सफर पूरा करने को यात्री लगेज यान या फिर विकलांग डिब्बे
में यात्रा करने को मजबूर होते हैं। जिसकी वजह से कई बार लोगों को
जुर्माना तक भरना पड़ जाता है।