फोटो- 36- बृहस्पतिवार के अंक में प्रकाशित खबर।
हरदोई। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को फिलहाल बदहाली व अव्यवस्थाओं से कुछ हद तक राहत मिल गई है। वार्डों में पड़े फटे पुराने व जर्जर गद्दों को हटाकर नए गद्दे डाल दिए गए हैं।
अमर उजाला में बृहस्पतिवार के अंक में समाचार प्रकाशित होते ही अस्पताल प्रबंधन ने संज्ञान लेते हुए वार्डों की सूरत बदलने का काम शुरू कर दिया है। प्रसूताओं के बेड पर अब साफ चादरें बिछवा दी गई हैं। इससे भर्ती महिलाओं और उनके तीमारदारों ने राहत महसूस की।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाही का खामियाजा प्रसूताओं और नवजातों को भुगतना पड़ रहा था। वर्षों पुराने फटे और जर्जर गद्दों पर प्रसूताओं और नवजातों को बिना चादर के ही लेटना पड़ रहा था। ऐसे में जच्चा व बच्चा दोनों पर संक्रमण का खतरा बना रहता था। इसके अलावा बेड के पास पड़ी मेज पर भी गंदगी जमा रहती थी। मरीज और उनके तीमारदार अपनी दवाएं और खाना उन पर ही रखते थे इससे भी संक्रमण फैलने का डर बना रहता था।
बता दें कि महिला अस्पताल की इन्हीं अव्यवस्थाओं से संबंधित खबर का प्रकाशन बृहस्पतिवार के अंक में ‘उपेक्षा की हद : चादर न सफाई... बदहाली में भर्ती गर्भवती’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। खबर प्रकाशित होते ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्राचार्य ने जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत स्थिति की समीक्षा करने और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। इसके बाद वार्डों में रखे खराब गद्दों को हटाकर उनके स्थान पर नए गद्दे लगवाए गए। बेडों पर साफ चादरें भी उपलब्ध कराई गईं। व्यवस्था बदलने के बाद वार्डों का माहौल भी पहले से बेहतर नजर आया।
मरीजों और तीमारदारों ने जताई खुशी
वार्डों में अचानक हुए इस बदलाव और व्यवस्था में सुधार से भर्ती प्रसूताओं व उनके तीमारदारों ने राहत की सांस ली। भर्ती प्रसूता रेशमा के परिजन अवधेश का कहना है कि गंदगी से संक्रमण का खतरा लगातार बना रहता था लेकिन अब बेडों पर साफ चादरें देखकर उन्हें राहत मिली है। एक अन्य तीमारदार राम खेलावन ने बताया कि वैसे तो सफाई नहीं हो रही थी लेकिन आज अचानक सुबह से ही डॉक्टर और स्टाफ के लोग सफाई व व्यवस्था सुधारने में लगे हुए हैं।
फोटो- 36- बृहस्पतिवार के अंक में प्रकाशित खबर।
फोटो- 36- बृहस्पतिवार के अंक में प्रकाशित खबर।